🌼5️⃣0️⃣🌼 ' पिता ' , हमारी जर्जर हो चुकी जिंदगी का वो सख्त सहारा होता हैं, जो लगता तो बड़ा ही कटु और कष्ट कारक हैं, पर उसी कटुता में हमारा पक्ष और उत्थान निहित रहता हैं। हमें उसका मूल्य तब समझ नहीं आता, और उनकी वो सख्ती दुःखदायी ही लगती हैं। जब पिता को लगता हैं कि उसका बेटा राह से भटक रहा हैं, तब वह अपने दायित्व को अदा करता है और अपने बेटे को सही पथ पर लाने के लिए विविध, अप्रत्यक्ष और अनन्य प्रयासों में जुट जाता हैं। वो तब भी अपने पुत्र से उतना ही प्यार करता हैं, जितना कि वह हमेशा से करता आया था...मगर अब वो पुत्र के प्रति अपने प्यार को जाहिर नहीं कर पाता हैं...वो उसकी फिक्र करता हैं, उसके बारे में सोचता रहता हैं, उसमें अपने सपनों को साकार होता हुआ देखना चाहता हैं तथा वह चाहता हैं कि तुम अपने हिस्से की तमाम उपलब्धियों को हासिल करो और इस तरह वो तुम्हें लेकर अक्...
'दबी-आवाज', मेरे द्वारा लिखी गई डायरी का संग्रह हैं,जिसमें मेरे लिखे विभिन्न विचार और संस्मरण है, जिन्हें मैं Blog के जरिए लोगों के सम्मुख लाना चाहता था l Hindi Blog, Hindi Article, हिंदी ब्लॉग, Hindi Writing, हिंदी लेख, Hindi Heart Touching Lines, Dard Bhari Lines, Hindi Blogging, हिंदी पंक्तियां, डायरी लेखन, Diary Writing, आलेख, संस्मरण, Sad Yaadein, Sad memories, यादें, Hindi Note, Hindi Personal Thought, Real Life Quotes, Life Lessons, हिंदी लेख, हिंदी विचार, Life Thought l SUDARSHAN ARYA