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मेरी आध्यात्मिक प्रवृत्ति

                               🔅5️⃣1️⃣🔅                           I Think...और सिर्फ मेरे सोचने से ही नहीं, अन्य प्रमाणों से भी ये तर्कसंगत सिद्ध होता हैं कि सनातन वैदिक धर्म ही ईश्वरीय और सत्यज्ञान तथा मूलधर्म हैं...इस बात में कोई संदेह नहीं..!..और जो हमें History में वैदिक काल वगैरह पढ़ाया जाता हैं वो सब झूठ हैं...वेदज्ञान का काल सृष्टि के साथ ही प्रारंभ होता है तथा जब सृष्टि प्रलय की प्रगाढ़ निद्रा में निमग्न रहती हैं,तब भी यह यथार्थ-वास्तविक ज्ञान मौजूद होता हैं।...सत्यज्ञान का कभी ह्वास नहीं होता!...बाकी दुनिया में प्रचलित सभी धर्म, मत-पंथ, सम्प्रदाय,जाति, रीति-रिवाज व विभिन्न संस्कृति इत्यादि जो वेद सम्मत नहीं हैं वे सब अनर्थ ज्ञान से निर्मित हुए है, जिनका अस्तित्व एकदम खोखला होता हैं एवं सत्य और वास्तविकता की पराकाष्ठा से उनका कोई नाता नहीं होता हैं।...और भी बहुत-सी बातें होती हैं, जो इस संबंध में फिलहाल लिखते वक्त मेरे अंदर चल रही...