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जून, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

59. मैं जवाबों के घेरों से मुक्ति चाहता था!!

                        "Note  No. 59"                                                                                                        बहुत  बार  मैं   लोगों के सवालों का समुचित और सुव्यवस्थित जवाब देता था...निष्ठा और विश्वास के साथ लगभग एक संतुष्ट जवाब, पर बहुत बार मेरे पास लोगों के छोटे-छोटे और आसान-से सवालों के जवाब भी नहीं होते थे और कभी जवाब होते भी, तो कुछ सवालों के जवाब देना मुझे कभी सही नहीं लगता था...बातें बहुत हैं!            विभिन्न लोगों के विभिन्न सवाल होते थे...और मैं बस चुप हो जाता था, तब मैं जवाबों के घेरों से मुक्ति चाहता था...उस वक्त मैं किसी को कुछ नहीं कहना चाहता था...वास्तव में, मैं अपने मौन...

58. वो चले जाते है, मगर पीछे कितनी ही निशानियां छोड़ जाते हैं, जो कितने ही संकेतों और अर्थों को उत्पन्न करती हैं!!

                                Note No. '58'                                          जो लोग सच्चे दिल से हमें चाहते हैं, हमारी परवाह करते हैं, असल में वही हमारे अपने होते हैं, बाकी सब दिखावा हैं...छलावा हैं!...वास्तव में वो हमारे बारे में जो कुछ सोंचते हैं, करते हैं अथवा हमारे लिए जो कुछ कहते हैं, उसके सच में बहुत मायने होते हैं। कभी महसूस करके देखो, हमारे लिए उनके द्वारा कही गई बातों में गहरे अर्थ और हमारे हित निहित होते हैं...पर कईं मर्तबा हम ऐसी अर्थपूर्ण और हितकारी बातों से तादात्म्य स्थापित नहीं कर पाते हैं और ना ही उनके अर्थों को समझ वा महसूस ही कर पाते हैं, पर ऐसा नहीं होना चाहिए...वक्त रहते ऐसी चीजों को समझ लेना चाहिए...हमारे प्रति उनकी सहानुभूति, प्रेम, वफ़ा अथवा आत्मीय भावों की कद्र कर लेनी चाहिए...नहीं तो फिर अफ़सोस के सिवा कुछ नहीं बचता...ऐसा अफ़सोस जो हमें सालता रहता हैं...हमेशा-हमेशा!!...