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चीजों का सामंजस्य

                      Note No. “109”               कभी-कभी चीज़ें अस्त व्यस्त पड़ी हो तो चलता हैं, लेकिन कौन सी चीज़ कहां होनी चाहिए, कहां नहीं ; ये बात मायने रखती हैं। चीजों को यथा स्थान रखने और कोई काम सफ़ाई व सटीकता से करने का सलीका इंसान के अंदर होना चाहिए...यह न केवल व्यवस्थित रहने में मदद करता है, बल्कि एक ताजगी और आनंद से भरी जिंदगी को भी सुनिश्चित करता है। यह परिप्रेक्ष्य मानवीय सुखशांति और समृद्धि के लिए भी महत्वपूर्ण है। जब हम चीजों को अपने आसपास सही ढंग से रखते हैं, तो हमें अपनी जिंदगी को अधिक आनंददायक बनाने का अवसर मिलता हैं।इस प्रकार, सही स्थान पर सही चीज़ों का सामंजस्य रखने से हम न सिर्फ अपने कामों को समय पर पूरा कर पाते हैं, बल्कि हम समय की बचत और उपयुक्त व्यवस्था के कारण स्ट्रेस से भी बच सकते है। साथ ही, जब हम अपने वस्त्र, सामान, और सामग्री को एक व्यवस्थित तरीके से रखते हैं, तो उन्हें खोजने और उपयोग करने में भी हमें आसानी होती है। यकीनन, यह छोटी-छोटी चीज़ें आपकी दैनिक ज़िन्दगी को बह...

मोहब्बत में कभी विकल्प नहीं होता

                     Note No. “108”                          यह एक गहरी और भावनात्मक भावना से भरी हुई विचारधारा का वर्णन हैं...सच्ची मोहब्बत में कभी विकल्प नहीं होता, और अगर विकल्प हुआ, तो फिर वो मोहब्बत ही नहीं हैं, छलावा हैं...फिर चाहे वे जिंदगी भर मिले या ना मिले, इस बात से क्या फ़र्क पड़ता हैं !...वास्तव में उसी एक की खातिर बेलाग खुशियों का त्याग करके ताउम्र उसके इंतजार में जिंदगी तमाम ख़ाक कर ली जाती हैं...पर अन्यथा नहीं हुआ जाता !...जिसे हम बेतहाशा चाहते हैं वो अंशगत हो जाता हैं, हममें समाहित हो जाता हैं ! अंततः उसके ना लौटने अथवा उसको फिर कभी ना पाने की नाउम्मीदी में भी किसी और का नहीं हुआ जा सकता, तथापि जिंदगी तन्हाई में बिताकर ताउम्र प्यार की वफ़ा और शुचिता को अखण्ड रखा जाता हैं।                                             प्रेम अपने प्रियतम के प्...

वो खंडहर...

                                 Note No.  '107'                            रोज की तरह लड़का मजदूर सराय से अजनबी जगह पर काम पर गया था...ये वही लड़का था, जिसने बेतरबी से कईं सारे ख़्वाब संजोए थे, जिन्हें वो बड़ी ही निष्ठा और लगन से पूरा करना करने की फेहरिस्त में लग भी गया था...लेकिन एक भयानक हादसा उसकी जिंदगी में तूफान बनकर आया था और उसका बहुत कुछ तबाह करके चला गया...दुर्भाग्य लड़के का, जो आज मजदूर सराय पर खड़ा था...!                                    लड़का जिस जगह पर उस दिन काम पर गया था...वहां पास ही एक खंडहर हो चुका घर था...लड़के ने उस घर को देखा और सोच में डूब गया...अपनी यादों में बहुत पीछे जाकर बचपन के खुशनुमा पलों को महसूस करने लगा !...उसने महसूस किया, "ये उसी का तो घर हैं", वो उस से बहुत जुड़कर रहती थी...ज्यादातर उसी के साथ रहना उसे प...