Note No. “108”
यह एक गहरी और भावनात्मक भावना से भरी हुई विचारधारा का वर्णन हैं...सच्ची मोहब्बत में कभी विकल्प नहीं होता, और अगर विकल्प हुआ, तो फिर वो मोहब्बत ही नहीं हैं, छलावा हैं...फिर चाहे वे जिंदगी भर मिले या ना मिले, इस बात से क्या फ़र्क पड़ता हैं !...वास्तव में उसी एक की खातिर बेलाग खुशियों का त्याग करके ताउम्र उसके इंतजार में जिंदगी तमाम ख़ाक कर ली जाती हैं...पर अन्यथा नहीं हुआ जाता !...जिसे हम बेतहाशा चाहते हैं वो अंशगत हो जाता हैं, हममें समाहित हो जाता हैं ! अंततः उसके ना लौटने अथवा उसको फिर कभी ना पाने की नाउम्मीदी में भी किसी और का नहीं हुआ जा सकता, तथापि जिंदगी तन्हाई में बिताकर ताउम्र प्यार की वफ़ा और शुचिता को अखण्ड रखा जाता हैं। प्रेम अपने प्रियतम के प्रति पूर्ण वफादारी और समर्पण को इंगित करता हैं, यकीनन वास्तविक मोहब्बत में अन्य विकल्प अथवा सम्मोहन नहीं होता, क्योंकि यह पूरी तरह सच्ची और निःस्वार्थ होती हैं । इस विश्वास के साथ कईं लोग अपने प्रियजन के लिए हर संभव प्रयास करते हैं, और वे खुशियों की परवाह किए बिना उन्हें खोने के डर के साथ जीते हैं। इस प्रकार के प्यार में आत्म–समर्पण और सांत्वना की भावना होती हैं, जो विशेष और गहरे बंधनों को बनाए रखती हैं। सामान्य तौर पर मान्यता हैं कि किसी व्यक्ति के लिए सच्ची मोहब्बत होती हैं , तो वह अपने साथी के लिए ख़ुद को निश्चित रूप से स्वीकार कर लेता हैं। सच्ची मोहब्बत अथवा प्रेम का बहुत ही सुंदर अंश ये हैं कि, जब हम किसी को बेहद चाहते हैं, तो हम उसके साथी बनने के लिए हर बाधा को पार करने को तैयार होते हैं। इसमें हमारे लिए उस व्यक्ति का साथ और उससे जुड़े सम्बन्ध ही सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, और इसलिए हम उसे खोने का खतरा नहीं उठा सकते । इसमें समर्पण और वफादारी की भावना रहती हैं, जो जीवन भर बनी रहती हैं। यथार्थ प्रेम में विकट दर्द और तकलीफें होती हैं, जो कईं भीषण कठिनाइयां सम्मुख लेकर आती हैं...मन वेदित व्यथित रहते हैं, परंतु सच्ची मोहब्बत, हमें उन सभी संघर्षों का सामना करने की ताकत और साहस प्रदान करती हैं जो हमारे और हमारे साथी के बीच में आ सकते हैं।
©SD. Arya

बेहतरीन👌🏽
जवाब देंहटाएंTo good
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