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अक्टूबर, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मैंने जीवन को बहुत मामूली और तुच्छ बना दिया था

              🔸  Note No. 48   🔸                         और आखिरकार मैंने एक दिन इस बात को महसूस किया था कि, मैंने अपनी जिंदगी को निहायत मामूली और तुच्छ बना लिया हैं, जोकि मेरे लिए यथाक्रम उचित बात नहीं थी।              मैं सब जानता था कि मेरी इस तरह की मानसिक उथल पुथल के भयंकर दुष्परिणाम होंगे तथा ये मुझे काफी पीड़ा भी देगी...पर मैं नहीं माना ! मैं गलती पर गलती करता गया और अंततः उन हालातों में फँस चुका था, जहां से सुरक्षित निकल पाना लगभग मुश्किल था।              सचमुच मेरी वो हालत हो गई थी, जिसमें इंसान की सारी की सारी उम्मीदें धराशायी हो चुकी होती हैं। मैं उस जगह पर था जहां कोई नया सपना देखकर उसे साकार ना किया जा सके...मेरी हिम्मत जवाब देने लगी थी तथा मैं अत्यधिक हताश हो चुका था और ये मेरे लिए एक बड़ा आघात था।             मैं जीवन के उस घातक पड़ाव पर था जहां नाकामियां स्पष्ट द...

आखरी वक्त में मेरी प्राथमिक टीचर का आशीर्वाद न मिलने का दर्द मुझे दुख देगा

                      Note No. '47'                                और आखिरकार मुझे वो दिन देखना पड़ा कि मैं अपनी आदरणीया प्राथमिक टीचर से उनके आखिर वक्त से पहले नहीं मिल पाया था । वो इस खोखली दुनिया को छोड़कर जा चुकी थी...हमेशा के लिए !                 मेरी दिली ख़्वाहिश थी कि मैं एक दिन काबिल और बहुत अच्छा इंसान बनकर ही उनसे मिलूंगा...और यही एक वजह थी कि मैं उनसे कभी मिलने नहीं गया...पर मैं गलत था जो ये सोचा करता था कि कुछ अच्छा करने के बाद मैं उनसे जाकर मिलूंगा...मेरी ये आशा पूरी होने से पूर्व ही वो चली गई ।                काश मैं उनसे समय रहते मिल लेता...मुझे इस गलती का मलाल सालता रहेगा ।                      मुझे इस तरह का फ़ैसला नहीं करना चाहिए था, पर मैं क्या करता मेरी भी कुछ मजबूरियां रही होगी, जो मुझे उनसे मि...

मुश्किलों से डरो नहीं, उनका डटकर सामना करो

                  🔸 Note No. 46 🔸                   कईं सारे लोग ऐसे होते हैं, जो ये मानते होंगे कि आखिर हमारे साथ ही इतनी सारी समस्याएँ क्यों हैं...हम ही क्यों इन तकलीफों से घिरे हुए हैं ? पर मेरे हिसाब से उनका ये सोचना पूर्णतया सच नहीं हैं। वास्तव में समस्याएं इंसान खुद पैदा करता है...अर्थात असल समस्या उनकी नकारात्मक सोच अथवा विचारों से पनपती हैं और लोगों का ये वहम भी हो सकता हैं कि उनकी समस्या अन्य लोगों की समस्या से बड़ी हैं जबकि ये भी सच नहीं हैं... हम दूसरों की मजबूरियों को नहीं जानते...हो सकता है उनकी परेशानी हमसे अधिक भयावह और कष्टकारक हो !           और हमें ये भी भलीभांति विदित होना चाहिए कि हम अपनी समस्या को जितना अधिक बड़ा मानेंगे वो उतना ही बड़ा रूप धारण कर लेगी तथा एक दिन हमें हार मानने पर मजबूर कर देगी। अतः हम इस मामले में सजग रहें कि हम समस्याओं से डरें नहीं जबकि उनका दृढ़ता से सामना करें और एक विजेता सी हिम्मत दिखाएं...मगर अफ़सोस लोग ऐसे मौकों पर अक्सर ह...

परिवर्तन सृष्टि का नियम है जो सभी चीजों पर लागू होता है

                   🔸   Note  No.  45   🔸                    जिंदगी में कुछ भी एकसमान नहीं रहता...समय के साथ सब कुछ बदल जाता हैं। परिवर्तन सृष्टि का नियम हैं, जो सब चीजों पर लागू होता हैं। हालात बदलते देर नहीं लगती...हम जो बीते कल में थे वो आज नहीं है और चाहकर भी आने वाले कल में ऐसे नहीं रह पाएंगे।            ये पल जो अभी का है यही हमारा हैं इसी को हम भरपूर जी ले...पता नहीं आने वाला वक्त क्या लेके आयेगा ? हम तय कर सकते हैं कि हमें परिवर्तनशीलता के इस सिद्धांत को समझते हुए समय के साथ त्वरित और यथोचित निर्णय लेकर आगे बढ़ जाना हैं या पोखर में जमा हुए पानी की मानिंद एक ही जगह रुक जाना हैं...संकल्प हमारा हैं और हमीं पर लागू होता हैं !                                                         ...

जीवन के कुछ बेहतरीन पल

                        Note No.  44                           कुछ पल होते है, जो हमारी जिंदगी में आकर्षक और भरपूर खुशियों की सौगात लेकर आते हैं, यदि इन्हें उल्लास के साथ जी लिया जाये तो हमारे पास हमेशा के लिए बेहतरीन यादों का कोष रह जाता हैं, जो कभी ख़त्म नहीं होता...और यद्भविष्य में जब हम अपने बीते वक्त को याद करते हैं, तो ये खुशनुमा लम्हें जो हमारी बेहतरीन यादों में संचय रहते हैं...हमें अलहदा ख़ुशी का कमाल का अहसास कराते हैं ये बड़ा ही सुकून देते है और तब जिंदगी से कोई शिकायत नहीं रहती हैं ।              और यदि हमने उन खास पलों को, जो हमारी जिंदगी में दस्तक देते है ऐसे ही जाने दिया अथवा उन्हें जी लेने का लुत्फ़ ना उठाया...तो फिर हमारे पास अफ़सोस के सिवा कुछ नहीं बचता। आगे जब हम गुजर चुकी जिंदगी को टटोलते हैं, तो हमें खूबसूरत यादों के रूप में कुछ नहीं मिलता है...वहां सबकुछ खाली-खाली और उजड़ा सा लगता हैं और तब हम पश्चा...

स्कूल टाइम के बरसात के दिन

                                                         🔸 Note No. 43 🔸                  स्कूल की किताबों की वो खुशबू मुझे आज भी याद है।                  बारिश शुरू होते ही स्कूल भी शुरू हो जाते थे। गर्मी की छुट्टियों की तपन बर्दाश्त करने के बाद...बरसात की ठण्डी बूँदें तन को शीतल कर देती थी...वाकई वर्षा ऋतु में भीगते हुए स्कूल जाने में अलग ही मजा आता था...और हमारी हथेलियों पर उन बूँदों की छुअन से कमाल की खुशी महसूस होती थी...झमाझम बारिश के साथ मैं भी मस्ती में झूम उठता था।                   और इसी तरह बारिश के संग नई किताबों की वो महक बरबस ही मन मोह लेती थी...उसमें अलग सा जुड़ाव महसूस होता था।                    बस्ता खुलता...फिर सब अपनी - अपनी क...

एक शिक्षक, जिसने जीवन पढ़ाया !

                                                Note No. '42'                                अपने गाँव से कक्षा पाँचवीं (जिला बोर्ड) की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद मेरा चयन संभाग स्तरीय शासकीय प्रतिभावान आवासीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, उज्जैन में हुआ। यह चयन मेरे जीवन का पहला बड़ा मोड़ था—एक ऐसा मोड़, जहाँ उत्साह से अधिक अनजानी आशंकाएँ मेरा इंतज़ार कर रही थीं। जब मैं पहली बार उस विद्यालय परिसर में पहुँचा, तो सबकुछ अपरिचित और कुछ हद तक वियोजित-सा लगा। नया स्कूल, नए शिक्षक, नए चेहरे और एक बिल्कुल अलग वातावरण—मानो मैं अपने परिचित संसार से अचानक बहुत दूर आ गया हूँ। मुझे वहाँ छोड़ने मेरे बड़े भाई आए थे। जब तक वे मेरे साथ रहे, तब तक मैं स्वयं को संभाले रहा; लेकिन जैसे ही वे लौटे, मेरे भीतर का साहस जैसे उनके साथ ही चला गया। उस रात मैं सो नहीं पाया। मैंने तकिए को अपने चेहरे से सटा लिया और चुपच...