" Note - 72 " हम अचानक दस्तक देने वाले मौकों, किसी के जबरन उकसाने या यकायक किसी के सहारे अथवा किसी के योगदान से ही अच्छा करने की शुरुआत कर सकते हैं ना कि स्वतः ही कुछ कर गुजरने के प्रण की राह देखते रहें...! अवसर कैसा भी हो हमारे लिये जायज होता हैं, बस शर्त ये हैं कि उसकी जड़ें सत्य की गहराई में धँसी हुई होनी चाहिए।...और ना ही कभी हममें ये संशय उत्पन्न होने चाहिए कि, " क्या हम इतने मामूली हैं कि छोटी - छोटी बातों से ही नहीं ऊबर पा रहें हैं और आखिर हम बेहतर करने का संकल्प क्यों नहीं ले पा रहे हैं या अपनी जीवन शैली में सुधार क्यों नहीं कर पा रहे हैं...इत्यादि ! " मेरे विचार से इस तरह की मनःस्थिति विघातक होती हैं जो किसी के लिए सही और सुरक्षित नहीं...इसके विपरीत हम तात्कालिक व अजनबी अवसर और वर्तमान का सही और संतुलित समायोजन कर आगे बढ़ सकते हैं...हमें इस बात का हमेशा अहसास रहना चाहिए कि किन्हीं भी परिस्थितियों में हम कभी गलत हो ...
'दबी-आवाज', मेरे द्वारा लिखी गई डायरी का संग्रह हैं,जिसमें मेरे लिखे विभिन्न विचार और संस्मरण है, जिन्हें मैं Blog के जरिए लोगों के सम्मुख लाना चाहता था l Hindi Blog, Hindi Article, हिंदी ब्लॉग, Hindi Writing, हिंदी लेख, Hindi Heart Touching Lines, Dard Bhari Lines, Hindi Blogging, हिंदी पंक्तियां, डायरी लेखन, Diary Writing, आलेख, संस्मरण, Sad Yaadein, Sad memories, यादें, Hindi Note, Hindi Personal Thought, Real Life Quotes, Life Lessons, हिंदी लेख, हिंदी विचार, Life Thought l SUDARSHAN ARYA