Note No. 80 जब इंसान दर्द और तकलीफों से तमाम खाक हो जाए तब, वास्तविक जिंदगी की फिर से शुरुआत कब और कैसे की जा सकती हैं, शायद कभी नहीं...किसी हाल में भी नहीं...और वाकई मैं वहाँ था जहाँ से फिर से कुछ भी शुरू नहीं किया जा सकता था...पर हाँ मैं इस बारे में सोंच तो सकता ही था और शायद ऐसे गंभीर हालातों में किसी भी बात पर सोच-विचार कर लेना ही महत्वपूर्ण होता हैं...ये काफी तो नहीं था, लेकिन फिर भी चाहे झूठी ही सही मगर तसल्ली के लिए ठीक था!...और अब इसी तसल्ली का दामन ही तो मुझे थाम लेना था...बहरहाल मैं और कर भी क्या सकता था...मेरे दर्दों ने मुझे हमेशा से तकलीफ़ ही दी थी, बजाय इसके कि वो मुझे जरा सुकून दे जाते...कुछ दर्द होते हैं जो थोड़ी राहत भी देते हैं...अफ़सोस मेरे पास ऐसा कोई दर्द नहीं था! ©Sd. Arya ...
'दबी-आवाज', मेरे द्वारा लिखी गई डायरी का संग्रह हैं,जिसमें मेरे लिखे विभिन्न विचार और संस्मरण है, जिन्हें मैं Blog के जरिए लोगों के सम्मुख लाना चाहता था l Hindi Blog, Hindi Article, हिंदी ब्लॉग, Hindi Writing, हिंदी लेख, Hindi Heart Touching Lines, Dard Bhari Lines, Hindi Blogging, हिंदी पंक्तियां, डायरी लेखन, Diary Writing, आलेख, संस्मरण, Sad Yaadein, Sad memories, यादें, Hindi Note, Hindi Personal Thought, Real Life Quotes, Life Lessons, हिंदी लेख, हिंदी विचार, Life Thought l SUDARSHAN ARYA