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मेरे दर्द ने हमेशा मुझे दुखी किया

                              Note No. 80           जब इंसान दर्द और तकलीफों से तमाम खाक हो जाए तब, वास्तविक जिंदगी की फिर से शुरुआत कब और कैसे की जा सकती हैं, शायद कभी नहीं...किसी हाल में भी नहीं...और वाकई मैं वहाँ था जहाँ से फिर से कुछ भी शुरू नहीं किया जा सकता था...पर हाँ मैं इस बारे में सोंच तो सकता ही था और शायद ऐसे गंभीर हालातों में किसी भी बात पर सोच-विचार कर लेना ही महत्वपूर्ण होता हैं...ये काफी तो नहीं था, लेकिन फिर भी चाहे झूठी ही सही मगर तसल्ली के लिए ठीक था!...और अब इसी तसल्ली का दामन ही तो मुझे थाम लेना था...बहरहाल मैं और कर भी क्या सकता था...मेरे दर्दों ने मुझे हमेशा से तकलीफ़ ही दी थी, बजाय इसके कि वो मुझे जरा सुकून दे जाते...कुछ दर्द होते हैं जो थोड़ी राहत भी देते हैं...अफ़सोस मेरे पास ऐसा कोई दर्द नहीं था!                                      ©Sd. Arya         ...