'Article No. 66' लापरवाहियों की भी हद होती हैं और मैंने तो लापरवाही की सारी हदें पार कर दी थी। फिर भी ऐसे वक्त में भी मैं Financially बहुत अलर्ट रहता था, चाहे वक्त मेरा बुरा था, लेकिन तभी भी मैं आर्थिक मामलों को लेकर हमेशा सजग रहता था...मैंने उस Field में उतनी लापरवाही नहीं की, जितनी कि अन्य और कहीं। मैं पूँजी, व्यवसाय और मौद्रिक आय की Importance को बखूबी समझता था और इन सब पर बहुत विचार भी करता था।...मैं तब भी Income के विभिन्न Sources एवं निवेश के अलग-अलग प्रकारों के बारे में सोंचा करता था, जबकि मैं निहायत ही Difficult और Opposite Situation में था...Problems जोकि मेरे बिल्कुल Against थी, But में इन सब बातों के बावजूद 'Power of Money' को अच्छे से जानता और समझता था...बहरहाल मैं उसके असर को क्यों और कैसे भूल सकता था। विरोधाभासों के बावजूद मैंने ...
'दबी-आवाज', मेरे द्वारा लिखी गई डायरी का संग्रह हैं,जिसमें मेरे लिखे विभिन्न विचार और संस्मरण है, जिन्हें मैं Blog के जरिए लोगों के सम्मुख लाना चाहता था l Hindi Blog, Hindi Article, हिंदी ब्लॉग, Hindi Writing, हिंदी लेख, Hindi Heart Touching Lines, Dard Bhari Lines, Hindi Blogging, हिंदी पंक्तियां, डायरी लेखन, Diary Writing, आलेख, संस्मरण, Sad Yaadein, Sad memories, यादें, Hindi Note, Hindi Personal Thought, Real Life Quotes, Life Lessons, हिंदी लेख, हिंदी विचार, Life Thought l SUDARSHAN ARYA