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जनवरी, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

वो जन्म देती हैं, तो समझती हैं कि वास्तव में दर्द क्या होता हैं...

            °Note ~ 79°              उसने तुम्हें अनमोल जीवन दिया...पर बदले में तुमसे कभी कुछ नहीं लिया...और आज जब वो तुम्हारे सहारे है, तो तुमने उसे प्रतिफल स्वरुप तंगहाली और अफ़सोसों से भरा जीवन दिया है...वास्तव में तुमने उस माँ को बेहद व्यथित और परेशान किया हैं..!!                                   वो जन्म देती हैं, तो समझती हैं कि दर्द क्या होता हैं...ऐसे ही वो बहुत से वेदनीय दर्दों को भी अपने अंदर समाहित कर लेती हैं, और जाहिर भी नहीं करती!                                      और तुम्हें इस बात का भी अहसास कहाँ कि उस ममतामयी माँ ने तुम्हें जिंदगी में आए हर खतरों से वाकिफ किया और बचाया था...राह तो बहुत भटके थे तुम...पर उसने मार्गदर्शक बन सही रास्ता सुझाया था...और इसी तरह कई और बाधाएं तुम पर बरसी होगी मगर हमेशा तुम्हारे ऊपर उसका छत रूपी साय...

हम भारतीय घातक अंधविश्वासों में सराबोर समाज में रहते हैं

                      ✴️ Note – 78 ✴️           हम भारतीय, घातक अंधविश्वास से सरोबार समाज में रहते हैं...हर रोज इस समाज के घातक प्रहारों से कईं लोग प्रताड़ित शोषित होते हैं...अंधविश्वास और क्रूरतम रीतियों के वशीभूत कइयों ने अपनी ज़िंदगी की आहुतियां दी और आज भी दे रहें हैं।इस मौजूदा समाज के लोग अनर्थ युक्त अनर्गल बातों अथवा कामों व कर्मकांडों में निर्लिल्प रहते हैं । ये शुभ-अशुभ का ताना-बाना बुनते है, न जाने किन किन दोषों के असर से धमकाते हैं, ये विभिन्न भ्रम को उपजाते हैं तथा शनि के कुख्यात भय से लोगों को डराते हैं और खुद भी डरते हैं और यही लोग उन्नति की बातें करते हैं...गजब विरोधाभास हैं अवनति के गर्त में फंसे और फंसाने वाले लोग आखिर कैसे एक स्वस्थ समाज के विकास की परिकल्पना कर सकते हैं..? मसला शोकपूर्ण और चिंताजनक हैं..!                                                       ...

काश इंसान यथार्थता के विभिन्न पहलुओं पर सच्चे दिल से विचार करता...

     💢  Note - 77  💢                                                          मुझे किसी भी तरह का ''वाद'' पसंद नहीं हैं...मैं सभी मामलों में सत्य के महान रहस्य तत्व के निहित होने में यकीन रखता हूँ । लोग अक्सर अपना - अपना एक अलग तबका या समूह बना लेते हैं जो किसी वाद विशेष पर आधारित होता हैं । वे इसके चक्कर में इस तरह से उलझ जाते हैं कि सही गलत को जानने - समझने की कभी कोशिश ही नहीं करते और अवैधानिक भी कर जाते हैं...वे व्यर्थ के अज्ञान में पड़कर आंखें मूंदे अनर्थ में लिप्त होते से लगते हैं, वे कभी उस रहस्य को समझने की कोशिश नहीं करते कि उनके इस प्रपंच से किसी का उद्धार नहीं होने वाला...विपरीत कालांतर में इसके प्रतिकूल परिणाम प्रदर्शित होते हैं । काल के तीव्रतम  रूप में बदलाव के युग के साथ ना चलकर, ये अतिरुढ़ और अभावी मानसिकता से सने लोग खोखले आधार पर सवार होके ना जाने किस तरह के विकास अथवा उन्नति की बातें करते हैं...इ...