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काश इंसान यथार्थता के विभिन्न पहलुओं पर सच्चे दिल से विचार करता...

    💢 Note - 77 💢

                                                        मुझे किसी भी तरह का ''वाद'' पसंद नहीं हैं...मैं सभी मामलों में सत्य के महान रहस्य तत्व के निहित होने में यकीन रखता हूँ । लोग अक्सर अपना - अपना एक अलग तबका या समूह बना लेते हैं जो किसी वाद विशेष पर आधारित होता हैं । वे इसके चक्कर में इस तरह से उलझ जाते हैं कि सही गलत को जानने - समझने की कभी कोशिश ही नहीं करते और अवैधानिक भी कर जाते हैं...वे व्यर्थ के अज्ञान में पड़कर आंखें मूंदे अनर्थ में लिप्त होते से लगते हैं, वे कभी उस रहस्य को समझने की कोशिश नहीं करते कि उनके इस प्रपंच से किसी का उद्धार नहीं होने वाला...विपरीत कालांतर में इसके प्रतिकूल परिणाम प्रदर्शित होते हैं । काल के तीव्रतम  रूप में बदलाव के युग के साथ ना चलकर, ये अतिरुढ़ और अभावी मानसिकता से सने लोग खोखले आधार पर सवार होके ना जाने किस तरह के विकास अथवा उन्नति की बातें करते हैं...इन्हें पता भी हैं कि ये कितना अमानवीय बवाल मचा रहें हैं ?                                  काश इंसान यथार्थता के विभिन्न पहलुओं पर सच्चे दिल से विचार करता...तो दुनिया के दृश्य ही बदल जाते !

                     ©SD. Arya           


             

                            

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