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जुलाई, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मुझे किताबें पढ़ना दिलचस्प लगता था

                         🔸 Note No. 09 🔸          किताबें हमेशा से मेरे लिए खास और महत्वपूर्ण थी...मैं किताबों से कभी जुदा नहीं रह पाया और गौरतलब है कि तमाम व्यस्तताओं के बावज़ूद आजतलक वे मेरे बेहद करीब हैं ।          शायद मैं उस वक्त कक्षा '06' में पढ़ रहा होगा, तभी से मैं कोर्स की किताबों के अलावा तरह-तरह की किताबें पढ़ा करता था।            तब किताबें मुझे सुकून भरा साथ देती थी...मैंने अपने इस जीवन में किताबों से बहुत कुछ सीखा है...किताबें मेरी सच्ची हमदर्द बनकर मुझे अपनेपन का एहसास कराती थी...वे मुझमें नवीन प्रेरणा और स्फूर्ति जगाती थी।           मैं "लाइब्रेरी" जाकर किस्म - किस्म की किताबों को खोज कर पढ़ा करता था...और उस वक्त तक मैं कुछ किताबें खरीद भी चुका था ।             किताबों से मेरा बेहद प्रगाढ़ और खूबसूरत सा रिश्ता है, जो ताउम्र बना रहेगा ।      ...

मुझे मेरी प्राथमिक टीचर की बहुत याद आती थी

🔸 Note No.  08 🔸                          आज April 14,2014 के दिन शाम के वक्त माँ से फोन पर मेरी बात हुई थी . माँ बता रही थी कि तेरी प्राइमरी स्कूल की टीचर तुझे फिर से याद कर रही थी . इसके पहले भी मेरी टीचर...माँ से कईं बार मेरे बारे में पूछ चुकी थी...उन्होंने मुझसे मिलने की इच्छा भी जताई थी...और इस बारे में माँ ने मुझसे कहा भी था...पर मैं उनसे कभी मिलने नहीं गया ।               इस वक्त वो लकवाग्रस्त थी और बहुत नाजुक हालात से गुजर रही थी...वो चलने फिरने के काबिल नहीं बची थी ।              मैं उन्हें बहुत याद करता था...पर मैं क्या करता...मैं उनसे अपनी मामूली और अभावी जिंदगी के साथ मिलना नहीं चाहता था...मैंने सोच रखा था कि मैं तभी उनसे जाकर मिलूंगा जब कभी मेरी किसी सिविल सर्विस के पद पर नियुक्ति हो जाएगी या फिर किसी दूसरे तरीके अथवा उद्यम से मैं कुछ पैसे कमाने लगूँगा, जिससे कि मैं खुद मैं थोड़ा गौरव महसूस कर सकूं...इसी तरह और भी कई बातें थी...

तब मुझे बहुत खुशी मिलती

                     🔸 Note No. 07 🔸                       जब मैं बहुत छोटा था और उस वक्त माँ और बाबूजी से जिद करने पर भी  अपनी पसंद की कोई चीज़ या खिलौना नहीं मिलता, तो  काफी रो लेने के बाद मैं मेरे लिए घर में रखी खाने की चीजें और अपना कोई पुराना खिलौना लेकर घर से बाहर निकल जाता था...वहां बाहर मैं अपनी चीजें मेरे संगी - साथियों के बीच मिल - बाँटकर खाता...पश्चात हम तरह - तरह के खेलों में व्यस्त हो जाते...और तब मुझे बेहद खुशी मिलती...वाकई बचपन बहुत प्यारा और मासूम होता हैं ।                                                         ©SD. Arya

औरों की तरह नहीं था । i was not like the others

                   🔸 Note No. 06 🔸                                               मैं औरों की तरह नहीं हो सकता...कभी नहीं  ! दूसरे लड़के कहाँ जाते है...क्या करते हैं...कैसे रहते है...! इन सब बातों से मुझे कोई सरोकार नहीं । ...क्या करूँ मैं कुछ ऐसा ही हूँ...जो दिल की सुनता हूँ...और वही करता हूँ जो मेरे दिल को सही लगता है...फिर परिस्थिति चाहे जैसी  भी हो...मुझे फर्क नहीं पड़ता !                                                    ©SD. Arya

मुझे खामोश रहना पसंद था

    05 .Note No               मुझे ख़ामोश रहना पसंद था...क्योंकि मैं कभी व्यर्थ की बातों में शामिल नहीं हो सकता था... हरगिज़ नहीं !               जिन शब्दों या बातों का कोई मतलब नहीं...उन्हें क्योंकर बोला जाए और उनमें शरीक हुआ जाए...मुझे उन्हीं लोगों से बातें करना पसंद था, जिनकी बातें दिल को छूती थी और जिनकी आवाज में एक गजब की कशिश होती थी।              वाकई उनके साथ बातचीत करना मुझे दिलचस्प लगता था...ऎसे व्यक्ति मेरे हिसाब से सच्चे इंसान होते हैं...जो औरों की भावनाओं को बखूबी समझते हैं और उनकी कद्र करते हैं...वो लाजवाब होते हैं !                                                     ©SD. Arya        

मैं खुश नहीं रहता था l I was not happy

                        🔸 Note No. 02 🔸                                       मेरे जानने-पहचानने वाले और मेरे मित्र अक्सर मुझसे कहा करते थे कि मैं खुश नहीं रहता हूँ...पर मैं उन्हें कैसे बताता कि खुश होने की कोई वजह उस वक्त तक मेरे पास नहीं थी...कोई तो वजह थी जो उस वक्त मेरे लिये बेहद खास थी और तब मैंने ये सोच रखा था कि जब कभी मैं उस वजह को हासिल कर लूंगा तब भरपूर ख़ुशियों से भी भर जाऊंगा।                                                                                               ©SD. Arya

My STAR

                          🔸 Note No. 01 🔸                                 किसे पता था और कभी सोंचा भी नहीं था कि मेरी सीधी- सादी जिंदगी इतनी बड़ी दर्द भरी हकीकत से होकर गुज़रेगी...और वो हकीकत ये थी कि कोई था ,जो अपना " भोर का तारा " था,,,जिसे हम हर रोज अपनी आँसू सनी आँखों से वृहद आसमां में निहारते थे...पर उसे इसकी एक पल की भी खबर तक नहीं थी...!                                                   ©SD. Arya