🔸Note No. 08🔸
आज April 14,2014 के दिन शाम के वक्त माँ से फोन पर मेरी बात हुई थी . माँ बता रही थी कि तेरी प्राइमरी स्कूल की टीचर तुझे फिर से याद कर रही थी . इसके पहले भी मेरी टीचर...माँ से कईं बार मेरे बारे में पूछ चुकी थी...उन्होंने मुझसे मिलने की इच्छा भी जताई थी...और इस बारे में माँ ने मुझसे कहा भी था...पर मैं उनसे कभी मिलने नहीं गया ।
इस वक्त वो लकवाग्रस्त थी और बहुत नाजुक हालात से गुजर रही थी...वो चलने फिरने के काबिल नहीं बची थी ।
मैं उन्हें बहुत याद करता था...पर मैं क्या करता...मैं उनसे अपनी मामूली और अभावी जिंदगी के साथ मिलना नहीं चाहता था...मैंने सोच रखा था कि मैं तभी उनसे जाकर मिलूंगा जब कभी मेरी किसी सिविल सर्विस के पद पर नियुक्ति हो जाएगी या फिर किसी दूसरे तरीके अथवा उद्यम से मैं कुछ पैसे कमाने लगूँगा, जिससे कि मैं खुद मैं थोड़ा गौरव महसूस कर सकूं...इसी तरह और भी कई बातें थी जो मुझे उनसे मिलने के लिए रोकती थी।
मैं अक्सर भगवान से उनके अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना किया करता था...मैं विनती करता था कि वो पूरी तरह स्वस्थ होके फिर से अपनी खुशहाल जिंदगी का लुत्फ उठा सके...मैं जल्द से जल्द उन्हें काबिल बनकर दिखाने की आशा करता था...पर ये सब कब होने वाला था...मैं नहीं जानता था...!
©SD. Arya

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