Note No. ‘98’ हमारे बचपन की बहुत सी बातें हमें याद नहीं रहती...फिर भी कुछ बातें, घटनाएं और लोग हमें याद रहते हैं...हम उन्हें भुलाए नहीं भूल सकते।...कुछ लोग यादों में जिंदा थे, जिन्होंने बचपन में मुझे प्यार दिया था...मेरे कुछ संगी साथी भी आजतलक अच्छे से याद थे, जिनके साथ मैंने खूब मस्तियां की थी और बहुत खेल खेले थे। बात तब की हैं, जब मेरे दूध के दांत गिर रहे थे। मुझे अपने दूध के दांतों का टूटना अच्छे से याद था...जब मेरा कोई दांत गिरने वाला होता था, तो मैं उसे अपनी जीभ से इधर–उधर हिलाता, दूसरे दांतों से उसपर दबाव बनाता था...और इस प्रक्रिया में उत्पन्न हुए दर्द से मुझे बेहद सुकून मिलता था। उस वक्त मेरे माता–पिता मेरी दीदी और मुझे लेकर आर्यसमाज संस्था उज्जैन में रहते थे। मेरा एडमिशन नजदीकी निजी प्राइमरी स्कूल में करवाया था, जहां स्कूल के आसपास बारिश के दिनों में काफ़ी गंदगी...
'दबी-आवाज', मेरे द्वारा लिखी गई डायरी का संग्रह हैं,जिसमें मेरे लिखे विभिन्न विचार और संस्मरण है, जिन्हें मैं Blog के जरिए लोगों के सम्मुख लाना चाहता था l Hindi Blog, Hindi Article, हिंदी ब्लॉग, Hindi Writing, हिंदी लेख, Hindi Heart Touching Lines, Dard Bhari Lines, Hindi Blogging, हिंदी पंक्तियां, डायरी लेखन, Diary Writing, आलेख, संस्मरण, Sad Yaadein, Sad memories, यादें, Hindi Note, Hindi Personal Thought, Real Life Quotes, Life Lessons, हिंदी लेख, हिंदी विचार, Life Thought l SUDARSHAN ARYA