Note ' 87 '
बहुत से लोग सोचते हैं कि उनके साथ इतनी सारी समस्याएं क्यों हैं...मगर बहुत मौकों पर उनकी ये सोच वहम मात्र होती...वास्तव में अधिकांश समस्याएं इंसान खुद पैदा करता हैं...अर्थात् असल समस्या उसकी नकारात्मक सोंच से पनपती हैं...।
दरअसल व्यक्ति को ये वहम भी होता हैं कि उसकी समस्या बहुत बड़ी और कष्टकारी हैं...और इस फेहरिस्त में वो दूसरों की गंभीर समस्याओं को भी नजरअंदाज कर जाता हैं...वो औरों की अत्यधिक मजबूरियों को देख नहीं पाता !
इंसान अपनी समस्याओं को जितना बड़ा मानेगा वो उतना ही बड़ा रूप धारण कर लेगी और उसे बेबस–लाचार बनाकर उसे हारने पे मजबूर कर देगी...व्याधि के ऐसे मुश्किल हालातों में इंसान की हिम्मत का ना टूटना ही मायने रखता हैं...पर लोग अक्सर यहीं हाथ खड़े कर देते हैं।
©SD. Arya

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