Note No. '90'
जिंदगी के सफर में मुझे कुछ लोग ऐसे मिले थे, जो हमेशा के लिए यादों में बसकर रह गए थे। फिर चाहे वे मेरे लिए अनजान ही क्यों ना थे, पर अपने खुले व्यवहार और जिंदादिली से उनमें गैरों को अपनी ओर खींच लेने का हुनर था, उनमें एक अलग ही आकर्षण होता था, जो हर किसी को बांध लेता था।... ऐसे लोग अनजाने होकर भी अपनों से थे...वो सच्चे हमदर्द थे...जिन्हें लोगों की तकलीफ का अहसास था।
विपरीत कुछ लोग ऐसे भी मिले थे, जो पता नहीं दूसरों से सहज क्यों नहीं रहते थे... औरों के प्रति ना जाने किस किस तरह का घृणित व्यवहार अपनाते थे...वो अपने स्वार्थ तक सीमित रहते और और औरों के लिए हीन संकोची भावना रखते थे...वो कभी किसी से घुलमिलर रहना पसंद नहीं करते थे। वो किसी के दुःख–दर्दों को कभी समझ नहीं पाते थे।...और ऐसे लोग हमारी खुशनुमा यादों के हिस्सा कभी नहीं बन सकते थे...वो स्वतः ही भुला दिए जाते थे !
©SD. Arya

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