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संभावनाओं को कभी भी उनके प्रत्यक्ष मूल्य से ना आंके...

                           Note No. ‘97’

 

   

          हमें संभावनाओं को कभी भी उनके प्रत्यक्ष मूल्य से नहीं आंकना चाहिए...हो सकता हैं कि कोई चीज़ बाहर से उतनी प्रभाव परक या उपयुक्त ना दिखती हो, जितनी कि वो होती हैं और वो आपकी आशा से अधिक उपयोगी साबित हो सकती हैं।

                  उदाहरण के तौर पर हम कमल के फूल के तनों के बारे में चर्चा कर सकते हैं ;  “खूबसूरत कमल फूल के तने एक स्वादिष्ट एवं मशहूर काश्मीरी व्यंजन ‘नादूर यखनी’ की मुख्य सामग्री होते हैं। पानी के अंदर मिलने वाले ये कमल फूल के रसीले तने उस शोरबे के स्वादों को बड़ी आसानी से सोख लेते हैं, जिसमें इनको पकाया जाता हैं...तदुपरांत इसका लाजवाब और मनभावन स्वाद का जिक्र अवर्णनीय हैं। “

                    तो कहा जा सकता हैं कि कोई अंदाजा नहीं लगा सकता कि कमल फूल के तनों से इतनी बेहतरीन पकवान बनाई जा सकती हैं।

                   कईं सारी संभावनाएं ऐसी ही होती हैं, जो अपने अप्रत्यक्ष रूप में विद्यमान होती हैं, और आम या सामान्य–सी दिखती हैं, लेकिन अत्यंत प्रभावशाली और मूल्यवान हो सकती हैं।

                                                ©SD. Arya       

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