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मैं बहुत से काम करना चाहता था...

                     "Note No. 84"



                    मैं कितने ही सारे काम करना चाहता था...बहुत अधिक व्यस्त रहना चाहता था...मैं काम में इतना अधिक व्यस्त रहना चाहता था कि चाहे कितना ही थककर चूर हो जाऊं, पर काम करता रहूं...मैं ठहरना नहीं चाहता था। मेरी ख्वाहिश थी कि मेरे पास करने के लिए सारे काम हो कि व्यर्थ की बातों के लिए मुझे ज़रा भी समय ना मिल सके।

                         मैं अपने अतीत में व्यर्थ गवाएं हुए पलों की आगे आने वाले वक्त का सदुपयोग कर भरपाई  करना चाहता था। मैं वो सबकुछ करना चाहता था, जिससे दिल को सच्ची खुशी का अहसास हो...मेरे कामों से लोगों में प्यार और खुशहाली का प्रसार हो।

                         मैं आज उन श्रेष्ठ कामों को अंजाम देना चाहता था, जिन्हें मैं किसी वजह से गुजर चुके वक्त में नहीं कर पाया था।

                                                                                              ©SD. Arya

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