सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

मैं तब सोंचा करता था कि काश वो लम्हें फिर से लौट आए...

                       "Note No. 83"           


          उस दिन मैं देर तक सोता रहा था...उठने से ठीक पहले तक मैंने एक छोटा सा ख्वाब देखा था...ख़्वाब कुछ यूं था कि...                                                                                                 मैं अपने किसी रिशतेदार के साथ अपने अंकल आंटी के घर जा रहा था...घर पहुंचने के बाद मैं अपनी आंटी के बड़े बेटे महेंद्र से बहुत सी बातें करने लगा...उस से कहने लगा कि मुझे उसकी सगाई वाले फोटो दिखाएं।...वो एल्बम लेके आता हैं और मुझे फ़ोटो दिखाने लगता हैं...फ़ोटो देख कर मैं उन दोनों की जोड़ी को लाज़वाब कहता हूं... कुछ देर में मां की आवाज़ सुनाई देती हैं...छोरा उठ! कब तक सोता रहेगा! दिन कितना चढ़ चुका हैं...और मां की आवाज़ सुनके मैं जग जग गया था।

                 महेंद्र और मेरी तब बातचीत बंद थी कोई कारण था जो हम बात नहीं करते थे...खैर जो भी हो पर मैं उस से तब भी उस से जी भर के ढेर सारी बातें करना चाहता था...मैं तब भी उसकी उतनी ही फिक्र करता था, जितनी की पहले।...हम दोनों भाई बाद में दोस्त पहले थे। वो भी क्या वक्त था, जब हम खूब मस्तियां किया करते थे। आपस में सभी तरह की बातें साझा किया करते थे...पर अब उस वक्त तक हम एकदूसरे से मिलते नहीं थे, बोलते नहीं थे...और तब मैं सोचा करता था कि काश वो लम्हें फिर से लौट आएं..!                                                                       हालांकि चाहे जो हो, मैं अपनी दोस्ती ताउम्र निभाऊंगा...मैं उसके प्रति हमेशा सहृदय बना रहूंगा...फिर चाहे वो मेरे प्रति जैसा भी नजरिया रखता हो...इससे क्या फ़र्क पड़ता हैं!

                                                ©SD. Arya

    

        

टिप्पणियाँ