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अगस्त, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मुझे दोस्तों में अपनी चीजें साझा करना पसंद था

                                  ०2️⃣2️⃣०                            जब मैं छोटा था और तब मेरे पास कोई खाने की वस्तु होती तो मुझे अक्सर उसे अपने साथियों के बीच मिल-बांटकर खाने पर  अच्छा लगता था और कभी इसी तरह कोई चीज़ मुझे सब में बाँटनी होती थी तो मैं औरों के मुकाबले अपना हिस्सा कम ही रखता था।यदि मैं ऐसा नहीं करता तो मुझे ठीक नहीं लगता था। इसलिए मैं किसी चीज़ का खुद से ज्यादा भाग मेरे संगी-साथियों को देना पसंद करता था।                                                                                  ©SD. Arya

मेरे जीवन का एक बहुत ही दर्दनाक और बुरा समय

                                     ▪️2️⃣1️⃣▪️                                                  मेरी खुशहाल और सामान्य सी ज़िन्दगी में अवसादी समस्याओं,बेवजह की चिंताओं और अप्राकृतिक विरोधाभासों ने तब दस्तक दी थी जब मैं कक्षा 09 में पढ़ता था । उस समय मैं अति तनावपूर्ण बोझिल जीवन जीने लगा था...! मैं व्यर्थ के झंजावातों में उलझने लगा था और स्कूल की पढ़ाई से मेरी दिलचस्पी धीरे - धीरे खत्म हो रही थी...कोर्स की किताबों को देखकर एक उब सी उठने लगी थी...गजब  विडंबना थी जिस लड़के को पढ़ाई से बेहद प्यार था उससे वो आज जुदा होने लगा था...!             क्लास 8 तक मेरा प्रदर्शन बेहतर था फिर धीरे धीरे मैं पढ़ाई से दूर होने लगा ।मैं दिन पर दिन पढ़ाई के प्रति अति लापरवाह होता जा रहा था...।              और ऐसा म...

मेरे जीवन के गुजरे कुछ सुखद क्षण मेरे नन्हे मित्र के साथ

          Note No.  ‘19’                    Jun. 2013, में मुझे एक नायाब दोस्त मिला...वो और कोई नहीं मेरे छोटे मामा का 7-8 वर्षीय लड़का था...और तब मैंने उसे अपना भाई बाद में पहले जिगरी दोस्त माना था...!                 मैं उससे पहले कभी इस तरह नहीं मिला था...बल्कि उसे शायद दो - तीन बार यूंही देखा होगा...क्योंकि मैं अब मामा के घर कम ही जाता था...जबकि मेरे बचपन के अधिकांश दिन वहीं बीते थे...!                 मुझे नहीं पता था कि मुझे एक गोल्डन फ्रेंड मिलने वाला है।बात तब की है जब वो गर्मी की छुट्टियों में अपने गांव उमराझर में अपने घर  था।...और मैं अपने गांव नांदेड़ में अपनी ज़िन्दगी के बोझिल दिन गुजार रहा था। उस वक्त मेरे शिक्षक मामाजी एक दिन मेरे घर पर आये और तब उन्होंने मुझसे उनके साथ चलने को कहा और कहा कि थोड़े दिन वहां रह लेना...तुझे नानी और बाकी सब याद करते है। इतना सुनने के बाद मैंने उनसे तुरंत मना कर दिया और एक ब...

सपनों का घर

                                  ▪️1️⃣8️⃣▪️                                                मैं एक भव्य और सुंदर आशियाने का ख्वाब देखा करता था...वो कोई आम आशियाना नहीं था वो तो बेहद अहम और खास था...ये बहुत बड़ा और विशिष्ट  शिल्पकला का परिचायक तथा विभिन्न कलाकृतियों से सुसज्जित था...वाकई ये खूबसूरत और कमाल का था...ये घर मेरी नियति का एक अहम हिस्सा था...जिसे मुझे किसी भी कीमत पर हकीकत में बदलना था...! मुझे इसे अपने लिये ना सही वरन् अपने पूरे परिवार के लिए बनवाना था...और मुझे तब तक चैन नहीं मिलेगा, जब तक कि मैं इसे एक दिन अपने तरीके से बनवा नहीं लेता...ये मेरा महत्वाकांक्षी सपना है जिसे मैं सच साबित करके ही रहूँगा...!                                  ©SD. Arya  

कुत्तों के पिल्लों के लिए मेरा प्यार

                                🔸 1️⃣7️⃣🔸                              Dec.2013 के एक रोज मैं  उज्जैन शहर में किसी कॉलोनी में बन रहे मकान के पास से गुजर रहा था...तभी मुझे वहाँ दिखाई दिया कि रेत के बड़े से ढेर पर कुतिया के कुछ छोटे - छोटे प्यारे पिल्ले अड्डा जमाए बैठे हैं  ।                 उन्हें देखते ही मैं रुक गया और अचानक एक बच्चे की मानिंद नटखट हो गया...मैं खुद को ये बोलने से नहीं रोक पाया कि 'अरे वा कितने क्यूट है आप सभी।'...पर वे मासूम पिल्ले कहां समझ पाते कि कोई उनके प्रति सहानुभूति जता रहा है...।                   उस दिन उन छोटे - छोटे पिल्लों को देखकर मुझे अपना बचपन याद आ गया था...जब मैं छोटा बच्चा था तब कुत्तों के बच्चों के साथ खूब खेला करता था...मुझे उनसे बेहद लगाव रहता था...और कईं दफा उन्हें उठाकर मैं अपने घर तक ले आत...

मां के आंसू

                           🔸 Note 1 6 🔸                                                           मैंने अपनी माँ की आँखों में दर्द के आँसू देखें हैं...मुझे अच्छी तरह से याद है...जब वो अपने जीवन के कठिन पलों का जिक्र करते - करते अक्सर रो दिया करती थी...उसके चेहरे पर पर आहें स्पष्ट दिखाई पड़ती थी...और जब-जब वो किसी बात को लेकर रोने लगती थी, तो उसे देखकर मेरे भी आंसू निकल जाया करते थे...मैं खुद को रोने से रोक नहीं पाता था !!                                                                                                  © SD. Arya...

किस्से–कहानियां

                        Note No. ‘15’                                                                मुझे अपने बचपन में दादी-नानी, मौसी - बुआ,बड़ी बहनों और बड़े बुजुर्गों व अन्य और लोगों से किस्से - कहानियाँ सुनने का बहुत शौक था।               जहाँ भी कहीं कहानी वार्तालाप इत्यादि चलते होते तो मैं ऐसे जमघट में झट से शामिल हो जाया करता था ।                इन कहानियों में से कुछ में प्यार की बातें होती थी... तो कुछ में दुःख - दर्द बयां होता था, किसी कहानी में किसी का समर्पण प्रदर्शित होता, कुछ में वीर योद्धाओं की बहादुरी का बखान होता था...कभी ये कहानियां नैतिक मूल्यों का वर्णन करती थी और इन कहानियों में कईं दफा चरित्र की महानता का भी उल्लेख मिलता था और भी कई सारी बातें इन किस्से कहानियों मे...

बालपन की भावुकता

                        #Note No. ‘14’                                                          मुझे बच्चे पसंद है...मैं उनसे बहुत प्यार करता हूँ  ।...वाकई बच्चों की अपनी एक अलग ही विशाल और निर्दोष दुनिया होती है...वे बड़े लोगों से ज्यादा भावुक होते हैं।               और फिर आखिरकार एक दिन इन्हीं बच्चों की जिंदगी ऐसे मोड़ से होकर गुजरती है...जब ये बच्चे बड़े होने लगते हैं और पता नहीं क्या-क्या समझ का बोझ ढोने लगते हैं...उनकी तमाम अच्छाइयाँ और दरियादिली कहीं खोने लगती है...वे खुद में सिमटने लगते है तथा कुछ भी महसूस करने की उनकी महत्वपूर्ण शक्ति कमजोर हो जाती है  ।              पर कम से कम ऐसा तो नहीं होना चाहिए...सच्चाई महसूस करने वाली महान्  शक्ति  हर इंसान में ताऊम्र बनी रहनी चाहिए...आखिर स...

बुजुर्ग गार्डनर की भावनात्मक बातें

                Note No. 13                                       ये तब की बात है जब मैं और मेरे कुछ मित्र कॉलेज में  पढ़ते थे...एक दिन मेरे साथी और मैं हमारे कॉलेज के गार्डन में बैठकर वक़्त बिता रहे थे...वहीं कॉलेज के बुजुर्ग Gardener बगीचे में सफाई कर रहे थे...उस वक्त मेरी उनसे कुछ पहलुओं को लेकर भावनात्मक रूप में बातें हुई, जिसकी शुरुआत मैंने की थी...उनसे हुई इस छोटी सी बातचीत में मैंने तब मानवता के गहरे अंशों को महसूस किया था...मैंने उस दिन ये भी जाना था कि...चाहे इंसान का पद या ओहदा छोटा हो मगर उसका वजूद या व्यक्तित्व ऊँचा काफ़ी ऊँचा हो सकता है...उनमें भावुकता के महान अध्याय छुपे हो सकते हैं ।                                                  ©SD. Arya