Note No. 13

ये तब की बात है जब मैं और मेरे कुछ मित्र कॉलेज में पढ़ते थे...एक दिन मेरे साथी और मैं हमारे कॉलेज के गार्डन में बैठकर वक़्त बिता रहे थे...वहीं कॉलेज के बुजुर्ग Gardener बगीचे में सफाई कर रहे थे...उस वक्त मेरी उनसे कुछ पहलुओं को लेकर भावनात्मक रूप में बातें हुई, जिसकी शुरुआत मैंने की थी...उनसे हुई इस छोटी सी बातचीत में मैंने तब मानवता के गहरे अंशों को महसूस किया था...मैंने उस दिन ये भी जाना था कि...चाहे इंसान का पद या ओहदा छोटा हो मगर उसका वजूद या व्यक्तित्व ऊँचा काफ़ी ऊँचा हो सकता है...उनमें भावुकता के महान अध्याय छुपे हो सकते हैं ।
©SD. Arya
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