मुझे अपने बचपन में दादी-नानी, मौसी - बुआ,बड़ी बहनों और बड़े बुजुर्गों व अन्य और लोगों से किस्से - कहानियाँ सुनने का बहुत शौक था।
जहाँ भी कहीं कहानी वार्तालाप इत्यादि चलते होते तो मैं ऐसे जमघट में झट से शामिल हो जाया करता था ।
इन कहानियों में से कुछ में प्यार की बातें होती थी... तो कुछ में दुःख - दर्द बयां होता था, किसी कहानी में किसी का समर्पण प्रदर्शित होता, कुछ में वीर योद्धाओं की बहादुरी का बखान होता था...कभी ये कहानियां नैतिक मूल्यों का वर्णन करती थी और इन कहानियों में कईं दफा चरित्र की महानता का भी उल्लेख मिलता था और भी कई सारी बातें इन किस्से कहानियों में छुपी रहती थी।
पर फिर भी बहुत सी कहानियां ऐसी भी होती थी जिनमें डर छुपा रहता था...कईं किस्साई बातें हमें ऐसी बता दी जाती थी,जो कि किसी भी तरह उचित ना होती थी । उनमें अंधविश्वास, भय, या रूढ़ियां और इसी प्रकार की कईं घोर अंधविश्वास से उपजी मिथ्या बातें शामिल होती थी।
खैर जो भी हो मुझे किस्से - कहानियां सुनना बेहद दिलचस्प लगता था...!
जहाँ भी कहीं कहानी वार्तालाप इत्यादि चलते होते तो मैं ऐसे जमघट में झट से शामिल हो जाया करता था ।
इन कहानियों में से कुछ में प्यार की बातें होती थी... तो कुछ में दुःख - दर्द बयां होता था, किसी कहानी में किसी का समर्पण प्रदर्शित होता, कुछ में वीर योद्धाओं की बहादुरी का बखान होता था...कभी ये कहानियां नैतिक मूल्यों का वर्णन करती थी और इन कहानियों में कईं दफा चरित्र की महानता का भी उल्लेख मिलता था और भी कई सारी बातें इन किस्से कहानियों में छुपी रहती थी।
पर फिर भी बहुत सी कहानियां ऐसी भी होती थी जिनमें डर छुपा रहता था...कईं किस्साई बातें हमें ऐसी बता दी जाती थी,जो कि किसी भी तरह उचित ना होती थी । उनमें अंधविश्वास, भय, या रूढ़ियां और इसी प्रकार की कईं घोर अंधविश्वास से उपजी मिथ्या बातें शामिल होती थी।
खैर जो भी हो मुझे किस्से - कहानियां सुनना बेहद दिलचस्प लगता था...!
©SD. Arya

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें