मुझे बच्चे पसंद है...मैं उनसे बहुत प्यार करता हूँ ।...वाकई बच्चों की अपनी एक अलग ही विशाल और निर्दोष दुनिया होती है...वे बड़े लोगों से ज्यादा भावुक होते हैं।
और फिर आखिरकार एक दिन इन्हीं बच्चों की जिंदगी ऐसे मोड़ से होकर गुजरती है...जब ये बच्चे बड़े होने लगते हैं और पता नहीं क्या-क्या समझ का बोझ ढोने लगते हैं...उनकी तमाम अच्छाइयाँ और दरियादिली कहीं खोने लगती है...वे खुद में सिमटने लगते है तथा कुछ भी महसूस करने की उनकी महत्वपूर्ण शक्ति कमजोर हो जाती है ।
पर कम से कम ऐसा तो नहीं होना चाहिए...सच्चाई महसूस करने वाली महान् शक्ति हर इंसान में ताऊम्र बनी रहनी चाहिए...आखिर साँस तक !
और फिर आखिरकार एक दिन इन्हीं बच्चों की जिंदगी ऐसे मोड़ से होकर गुजरती है...जब ये बच्चे बड़े होने लगते हैं और पता नहीं क्या-क्या समझ का बोझ ढोने लगते हैं...उनकी तमाम अच्छाइयाँ और दरियादिली कहीं खोने लगती है...वे खुद में सिमटने लगते है तथा कुछ भी महसूस करने की उनकी महत्वपूर्ण शक्ति कमजोर हो जाती है ।
पर कम से कम ऐसा तो नहीं होना चाहिए...सच्चाई महसूस करने वाली महान् शक्ति हर इंसान में ताऊम्र बनी रहनी चाहिए...आखिर साँस तक !
©SD. Arya

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