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भीरुता लोगों के अंदर तक धँस जाती हैं और प्रमादों की विभिन्न परतों के प्रभाव से लोगों का ज़मीर दोषपूर्ण हो जाता हैं!!

                          "Note No. 67"              समाज के विभिन्न मूर्खतापूर्ण रीति-रिवाजों में उलझकर रह जाना और उनके अनुरूप खुद को ढाल लेना ही तुम्हारे कमज़ोर चरित्र को दिखाता हैं...तुम्हारी बुज़दिली को दिखाता हैं...और ये दर्शाता हैं कि तुम्हारा किरदार कितना हीन अथवा तुच्छ हैं, जोकि अन्यथा ही गुलामी को ढो रहा हैं और एक बोझिल जिंदगी जी रहा हैं...याद रहे, इंसान का किरदार महत्वपूर्ण हैं!                                                                                 नज़रिया मेरा हो या मेरे जैसे किसी और का हो ये सरासर गलत ही हैं...मैं कभी ऐसी पाबन्दियों का मोहताज़ नहीं रहा और ना ही कभी हो सकता हूँ। मैंने हमेशा अपने दिल की आवाज़ सुनी हैं, वैसे हर किसी को सुननी चाहिए, जो बहुत कुछ कहती हैं और एक...