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इस बाजी में तुम मेरा दिल जीत ले जाओ, बस यही तुम्हारे लिए काफ़ी हैं

                    *Article No.57*                  दोस्ती में मेरे लिए कोई TERMS और CONDITIONS नहीं हैं, और ना ही कभी मैं इस तरह की कभी किसी से कोई आशा रखता हूँ।...याद रहे, दोस्ती में, मैं तुम्हें किसी भी तरह की बाध्यता या दबाव को कभी महसूस नहीं होने दूँगा...हाँ मगर शर्त ये हैं कि इस बाज़ी में तुम मेरा 'दिल' जीत ले जाओ...बस यही तुम्हारे लिए काफी हैं... हालाँकि ये तुम्हारे लिए मुश्किल और बेहद मुश्किल होगा, पर नामुमकिन तो नहीं!               और किसी का दिल जीत लेना सृष्टि की महान उपलब्धियों में से एक हैं...बस ये इंसान पर निर्भर करता हैं कि वह इस काम को कैसे और किस निष्ठा और श्रद्धा भावना से पूरा करे अथवा इस संबंध में उसकी सोच और उसका दृष्टिकोण क्या हैं?!                हाँ बिल्कुल, सच्ची मित्रता मेरे लिए बेहद महत्वपूर्ण और अत्यधिक मूल्यवान हैं, जिसके लिए मैं हरदम तत्पर एवं प्रतिबद्ध हूँ व अंततः निश्चय ही आखिर सांस तक यथो...

मैं व्यापार के क्षेत्र में कुछ नहीं जानता था, लेकिन मुझे बाज और उसकी शैली पसंद है…शायद इसका कुछ अर्थ है।

                      " Article No.56 "                 एक व्यक्ति ने मुझसे कहा था..."कि तुम Negative बहुत हो,बहुत सोंचते हो, इतना Emotional हो जितना कि युग के हिसाब से नहीं होना चाहिए, कुछ मिलनसार तो हो पर साथ ही लोगों से तुम्हें ऐतराज़ भी बहुत हैं और भी बहुत सारी खामियाँ तुममें हैं और ये चीजें कुछ ऐसी हैं कि तुम्हें एक सफल बिज़नेस मेन  बनने से रोकेगी और बिल्कुल तोड़ कर रख देगी।", उसने आगे कहा, "एक और बात ये भी हैं कि तुम्हारे पास किसी भी तरह का Business Knowledge या कोई कौशल विशेष भी तो नहीं हैं, फिर तुम किस Basis पर सोचते हो कि Business करोगे तथा उस फ़ेहरिस्त मेंं सफलता हासिल करोगे, जबकि तुम उसकेे लायक ही नहीं हो।... बिज़नेस का क्षेत्र बहुत जटिल एवं एक वृहद मायाजाल हैं इससे बचकर ही रहो तो बेेहतर हैैं...अगर इसमें घुसे तो खोकर रह जाओगे और कभी निकल नहीं पाओगे...ये तुम्हें सदा के लिए निगल जाएगा...तो जाओ और जाके कोई ऐसा काम करो, जिससे कि तुम और तुम्हारे परिवार का जीवन अच्छे से गुजर सके अथवा...

वो मुझसे नाराज़ था...और उसके शब्दों में, मेरे प्रति नाराजगी और शिकायत स्पष्ट थी

             # @rticle No. '55'               मैंने ये कभी नहीं सोंचा था कि मेरे माता - पिता, भाई और बहन के अलावा कोई अन्य व्यक्ति भी मुझसे उम्मीद रख सकता हैं!...हाँ वो मेरा करीबी घनिष्ठ मित्र था जिसका मैं यहाँ नाम नहीं लेना चाहूँगा...दोस्ती में लगाव और घनिष्ठता कब बढ़ जाती हैं, हमें पता ही नहीं चलता!...हालांकि मुझे पता था कि वो मेरा एक अच्छा दोस्त हैं, पर कभी लगा नहीं कि वो सच में मुझसे वास्तविक उम्मीदें रखता होगा या फिर मुझपे भरोसा करता हो और शायद साथ ही थोड़ी फ़िक्र भी!                   एक दिन उसका मेरे पास फोन कॉल आता हैं...कॉल पर वह कहता हैं, कि -  "तू अपनी जिंदगी बस ऐसे ही बिना किसी उद्देश्य के जी भाई...कुछ मत कर...जब तुझे रहने को घर और खाने को भरपूर खाना मिल रहा हैं, तो फिर काम क्यों करना...बस यूँही एन्जॉय करो और मस्त रहो...बिना किसी लक्ष्य के।...क्योंकि तुझे तो कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि तेरे  माता - पिता, भाई-बहन और आखिरकार मुझे भी तुझसे कितनी उम्मीदें थी, उनका ...

मैं कोई भी काम व्यवस्थित तरीके से नहीं करता था और न ही मेरे पास किसी काम को सही तरीके से करने का तरीका होता था

                     ° Note No. 54 °                            मैं अक्सर लोगों को काम करते हुए देखता था...कितने ही लोग और काम भी कितने ही! शायद अधिकतर लोग अपने काम से बेहद प्यार करते थे...वे अपने काम में पूरे मन से लगे रहते थे, कुछ लोग तो अपने काम में इतने busy हो जाते थे कि बाहरी दुनिया में क्या चल रहा है, उन्हें इसकी खबर तक नहीं होती थी...I think शायद लोगों में अपने काम के प्रति ऐसी ही दिल्लगी होनी चाहिए।        मैंने देखा था, लोगों का काम करने का अपना एक तरीका और Perfection होता था,लोग अपने काम के प्रति वफ़ादार और अधिक सजग रहते थे...पर मैं नहीं था! मैं इस मामले में थोड़ा लापरवाह क़िस्म का था...मैं किसी भी काम को Managed Process में नहीं कर पाता था, उसे करने का मेरा अपना एक तरीका होता था...शायद मैं और लोगों के जितना Active और Perfect नहीं था। हर काम करने के मामले में,मैं हमेशा से Lazy type का लड़का रहा था।...बचपन में भी मैं ज्यादा काम और मे...

जीवन एक महान लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक बहुत ही महत्वपूर्ण, उद्देश्यपूर्ण और हमेशा अग्रणी यात्रा हैं ।

              Article No. 53                                                                                                         अगर पूरी ईमानदारी व जवाबदेही तथा पूरी निष्ठा और शिद्दत से  अथवा यथार्थ की गहराई से  सोंचो तो जीवन बहुत कुछ और एक बड़ी महत्वपूर्ण, उद्देश्यपरक तथा एक महान लक्ष्य की प्राप्ति की निरंतर अग्रसर रहने वाली महती यात्रा हैं ...अन्यथा नहीं तो कुछ भी नहीं!            हर इंसान के लिए इस जीवन यात्रा का उद्देश्य सिर्फ अपनी नियति अथवा लक्ष्य को पा लेना ही नहीं होना चाहिए, अपितु उसे अपने चरित्र में उत्कृष्ट बातों और गुणों का अनवरत समावेश और विकास करना भी उसका उद्देश्य रहना चाहिए...इसी का नाम जिंदगी हैं।यही श्रेष्ठ और महान बातें व्यक्ति...

मेरी आध्यात्मिक प्रवृत्ति

                               🔅5️⃣1️⃣🔅                           I Think...और सिर्फ मेरे सोचने से ही नहीं, अन्य प्रमाणों से भी ये तर्कसंगत सिद्ध होता हैं कि सनातन वैदिक धर्म ही ईश्वरीय और सत्यज्ञान तथा मूलधर्म हैं...इस बात में कोई संदेह नहीं..!..और जो हमें History में वैदिक काल वगैरह पढ़ाया जाता हैं वो सब झूठ हैं...वेदज्ञान का काल सृष्टि के साथ ही प्रारंभ होता है तथा जब सृष्टि प्रलय की प्रगाढ़ निद्रा में निमग्न रहती हैं,तब भी यह यथार्थ-वास्तविक ज्ञान मौजूद होता हैं।...सत्यज्ञान का कभी ह्वास नहीं होता!...बाकी दुनिया में प्रचलित सभी धर्म, मत-पंथ, सम्प्रदाय,जाति, रीति-रिवाज व विभिन्न संस्कृति इत्यादि जो वेद सम्मत नहीं हैं वे सब अनर्थ ज्ञान से निर्मित हुए है, जिनका अस्तित्व एकदम खोखला होता हैं एवं सत्य और वास्तविकता की पराकाष्ठा से उनका कोई नाता नहीं होता हैं।...और भी बहुत-सी बातें होती हैं, जो इस संबंध में फिलहाल लिखते वक्त मेरे अंदर चल रही...