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जुलाई, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बहुत बार चीजें सिर्फ इसलिए नहीं जुड़ती, क्योंकि जोड़ने का हुनर लोगों को पता नहीं होता!

                 Note No.63         कभी-कभी चीजें जैसे टूटती हैं, वैसे जुड़ भी जाती हैं, फिर चाहे वो कुछ भी हो...रिश्ते, सपने, मनोबल, उम्मीदें या कुछ और...जोड़ना आना चाहिए...सबकुछ जुड़ जाता हैं।।                                                                                           बहुत बार चीजें सिर्फ इसलिए नहीं जुड़ती क्योंकि उन्हें जोड़ने का हुनर लोगों को पता नहीं होता।...सब खेल हुनर का ही हैं...हुनरमंद लोग कईं चीजों पर महारत हासिल कर लेते हैं...कितनी ही चढ़ाईंयाँ चढ़ जाते हैं...फिर चाहे दुर्गम पहाड़ों या Mount Everest(Himalaya) की अत्यंत ऊँची चढ़ाई ही क्यों न हो।।                                      ...

मैंने सुख कहीं और पाया और महसूस किया...

                         "Note No. 62"                      वैसे तो मैंने थोड़े मौकों पर किसी न किसी को कुछ न कुछ Thank You Notes भेजे थे, पर ज्यादा नहीं... हालाँकि मैं हमेशा से लोगों के प्रति आभार व्यक्त करना जरूरी समझता था, पर लोगों के लिए जिसकी कोई Value नहीं थी।               मुझे शादी-पार्टी और विविध उत्सवों से हमेशा परहेज रहता था, उनमें शरीक होना कभी अच्छा नहीं लगता था और ना ही तब वहाँ लोगों के साथ व्यर्थ की गपशप करना या वहाँ जाके सबके सामने चाव से खाना, खाना ही मुझे कभी पसंद नहीं आता था। इस तरह ऐसे मौकों पर कभी-कभी मजबूरन ही मैं शामिल होता था। https://www.instagram.com/reel/CSmd5P3lLLL/?utm_medium=copy_link                बहुत कम मौकों पर मैंने लोगों को Anniversary, Wedding Anniversary की Blessings दी थी। बहुत कम या लगभग न के बराबर मैंने लोगों को उनका Birthday Wish किया था। ना ही मैंने कभी...

मेरी खास दोस्त को पत्र, वो एक बेतरीन मित्र थी

                       " Note No. 61 "        Dear,            Well thanks...उन सभी बातों के लिए, जिसमें कि तुम मेरी इतनी कद्र करती हो और जिसके कि मैं वैसे भी बिल्कुल लायक नहीं हूँ...तुम हमेशा मेरे लिए तत्पर और समर्पित-सी भावनाओं को महसूस करती हो और साथ ही मुझे ये अहसास भी कराती थी कि तुम मेरे प्रति कितनी वफ़ादार हो, जबकि मैं तुम्हारे प्रति उतना तत्पर और वफ़ादार कभी नहीं रहा और ना ही कभी हो सकता हूँ।...कितनी ही और भी बहुत कुछ बातें हैं, जिनके लिए मैं तुम्हारा दिल से शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ। साथ ही मैं तुमसे ये प्रार्थना और आशा भी करता हूँ कि मेरे बारे में तुम्हें ज्यादा नहीं सोंचना चाहिए...ना ही अधिक भावुक होना चाहिए।...किसी के लिए इतनी बेहिसाब चाहत अच्छी नहीं होती...और इतनी तीव्रतम चाहत वहीं होती हैं, जहाँ युगल एक-दूसरे को बेइंतेहा प्यार करते हैं और उन दोनों की नियति एक-दूजे के प्यार को पा लेने की होती हैं...और अगर उनका प्यार समर्थ न भी हो पाए तब भी वो एक-दूसरे के लिए सम्पूर्...

60. तुम्हारी साँसों का चलना ही महत्वपूर्ण हैं...

                  Note   No. 60                           मुसीबतें कभी बताकर नहीं आती और जब आ जाती हैं, तो फिर आसानी से जाने का नाम भी नहीं लेती।बदनसीब हैं वो लोग जिनपर आफतों का पहाड़ टूट पड़ता हैं...और शायद मैं भी उसी वर्ग का एक हिस्सा हूँ, जो दुर्भाग्यवश जिंदगी से जुड़ी आफतों से जूझ रहा हूँ।          बहुत बार समस्याओं के समाधान कभी नहीं  मिलते...और ना ही उनका कोई छोर...बस उन्हें बर्दाश्त करना पड़ता हैं...उनके साथ ही घुटकर जीना होता हैं...उनके दर्द को बखूबी सहना होता हैं। इंसान दर्द से आक्रांत होकर रोता हैं, बिलखता हैं, तड़पता हैं किंतु चाहकर भी किसी निष्कर्ष-निवारण पर नहीं पहुंच पाता।...तत्पश्चात दर्द अथवा कष्ट का अतिरेक हो जाता हैं, जो जीवन को नितांत कमजोर कर देता हैं...आस्था, विश्वास और उम्मीदें सबकुछ लगभग टूट सी जाती हैं, जीवन निरुद्देश्य तथा सारहीन लगने लगता हैं और किसी बड़ी-पुरानी जर्जर हो चुकी ईमारत की भाँति भरभरा कर धराशायी हो जाता हैं। ...