Note No.63
कभी-कभी चीजें जैसे टूटती हैं, वैसे जुड़ भी जाती हैं, फिर चाहे वो कुछ भी हो...रिश्ते, सपने, मनोबल, उम्मीदें या कुछ और...जोड़ना आना चाहिए...सबकुछ जुड़ जाता हैं।। बहुत बार चीजें सिर्फ इसलिए नहीं जुड़ती क्योंकि उन्हें जोड़ने का हुनर लोगों को पता नहीं होता।...सब खेल हुनर का ही हैं...हुनरमंद लोग कईं चीजों पर महारत हासिल कर लेते हैं...कितनी ही चढ़ाईंयाँ चढ़ जाते हैं...फिर चाहे दुर्गम पहाड़ों या Mount Everest(Himalaya) की अत्यंत ऊँची चढ़ाई ही क्यों न हो।। जिन कृत्रिम पैरों से दैनिक जीवन में कुशलता से चल पाना भी उतना आसान नहीं होता, उन्हीं Prosthetic Legs के दम पर 'अरुणिमा सिन्हा' ने Everest फ़तह करके दिखाया था...ट्रैन हादसे में उन्होंने अपने पैर खोये थे...मनोबल नहीं! ...आशय वही हैं, बहुत कुछ और बेहद ज्यादा टूटा हुआ भी जुड़ता हैं...बस उसे जोड़ लेने वाला चाहिए!!
©SD. Arya

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