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मेरी खास दोस्त को पत्र, वो एक बेतरीन मित्र थी

                      " Note No. 61 "


      


Dear,

           Well thanks...उन सभी बातों के लिए, जिसमें कि तुम मेरी इतनी कद्र करती हो और जिसके कि मैं वैसे भी बिल्कुल लायक नहीं हूँ...तुम हमेशा मेरे लिए तत्पर और समर्पित-सी भावनाओं को महसूस करती हो और साथ ही मुझे ये अहसास भी कराती थी कि तुम मेरे प्रति कितनी वफ़ादार हो, जबकि मैं तुम्हारे प्रति उतना तत्पर और वफ़ादार कभी नहीं रहा और ना ही कभी हो सकता हूँ।...कितनी ही और भी बहुत कुछ बातें हैं, जिनके लिए मैं तुम्हारा दिल से शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ। साथ ही मैं तुमसे ये प्रार्थना और आशा भी करता हूँ कि मेरे बारे में तुम्हें ज्यादा नहीं सोंचना चाहिए...ना ही अधिक भावुक होना चाहिए।...किसी के लिए इतनी बेहिसाब चाहत अच्छी नहीं होती...और इतनी तीव्रतम चाहत वहीं होती हैं, जहाँ युगल एक-दूसरे को बेइंतेहा प्यार करते हैं और उन दोनों की नियति एक-दूजे के प्यार को पा लेने की होती हैं...और अगर उनका प्यार समर्थ न भी हो पाए तब भी वो एक-दूसरे के लिए सम्पूर्ण समर्पित रहते हैं, उनकी प्रेम की भावनाओं में कभी अभाव अथवा अशुद्धि नहीं आती।

             कहने को बातें और भी बहुत हैं, पर इतना ही। आशा करता हूँ कि तुम मेरी बातों पर अमल करोगी और हमारी दोस्ती को यथार्थ एवं उसकी शुचिता को बरकरार रखोगी!


                                    ®©SD. Arya

                    


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