Note No. ‘96’
मुझे पता था कि मेरी मौजूदा हालत बेहद खराब थी...मैंने हालातों को बद से बदतर बना लिया था। मैं अच्छी तरह से समझता था कि ये सब मेरे लिए सही नहीं था, फिर भी मैं अनजानी बातों से बेहद परेशान था...मैं घुटता रहता था।...मैं अपने अतीत के पलों को याद करके दुःखी और हताश–निराश हुआ करता था...मैं आने वाले भविष्य के बारे में बेवजह के खयालातों को सोंचकर तकलीफ़ में जीता था। मैं अपने वर्तमान समय के प्रति पूरी ईमानदारी से जवाबदेह नहीं था...हालांकि मुझे भलीभांति विदित और इस महत्व को अच्छी तरह से जानता था कि जिंदगी और कुछ नहीं...बस वह पल या लम्हा हैं जो हम अभी जी रहें हैं और यही हमारा हैं...इसे हमें शिद्दत से जीना चाहिए।...पर मैं क्या कर सकता था...सबकुछ समझते हुए हुए भी तो नासमझ बनता जा रहा था और खुद का बहुत नुकसान करता जा रहा था।
अत्यंत ह्वास के इस पड़ाव के बाद और बहुत कुछ खो जाने वा खत्म हो जाने के बाद भी आखिरकार मुझे जागना तो था ही...मुझे तूफानी वापसी करनी थी...मैं थमकर तो हरगिज़ नहीं रह सकता था...मुझे फिर से मजबूती के साथ खड़ा होना था..!
©SD. Arya

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