"Note No. 81"
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बड़ी आसानी से मैंने लिखना छोड़ दिया था...वो भी उन पलों में जब मुझे ऐसा कुछ लिखना था, जो वाकई लाजवाब हो...हां बिलकुल मेरे जेहन में उस वक्त कईं विचार मौजूद थे...! और हालांकि मैं अपने काव्य संग्रह "ममत्व मंजरी" एवं "शांत सागर" तथा गद्य में दबी आवाज डायरी को दो हिस्सों में तब तक पूरा कर चुका था। तत्पश्चात मैंने अपने महत्वाकांक्षी उपन्यास को लिखने की शुरुआत की थी पर शुरुआत में ही लेखन बाधा से मैं उसे पूरा न कर सका था! और आखिरकार काफ़ी लंबे अरसे बाद मैं फिर से लिखने को बेताब था...जुलाई 09, 2017 को मैंने फिर से लिखने की शुरुआत की थी।
©SD. Arya

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