°Note ~ 79°
उसने तुम्हें अनमोल जीवन दिया...पर बदले में तुमसे कभी कुछ नहीं लिया...और आज जब वो तुम्हारे सहारे है, तो तुमने उसे प्रतिफल स्वरुप तंगहाली और अफ़सोसों से भरा जीवन दिया है...वास्तव में तुमने उस माँ को बेहद व्यथित और परेशान किया हैं..!! वो जन्म देती हैं, तो समझती हैं कि दर्द क्या होता हैं...ऐसे ही वो बहुत से वेदनीय दर्दों को भी अपने अंदर समाहित कर लेती हैं, और जाहिर भी नहीं करती! और तुम्हें इस बात का भी अहसास कहाँ कि उस ममतामयी माँ ने तुम्हें जिंदगी में आए हर खतरों से वाकिफ किया और बचाया था...राह तो बहुत भटके थे तुम...पर उसने मार्गदर्शक बन सही रास्ता सुझाया था...और इसी तरह कई और बाधाएं तुम पर बरसी होगी मगर हमेशा तुम्हारे ऊपर उसका छत रूपी साया था।...तुममें प्रज्ञा प्रवाहित हो इसलिये तुम्हें वो किस्से - कहानियां सुनाती थी...तुम्हें अच्छी - अच्छी बातें बताती थी और तुम सुंदर - सलोनी नींद में निमग्न रहो...इस वास्ते हर रोज तुम्हें लौरी गा - गा कर सुलाती थी।...और जब तुम उसकी आँखों से कभी कहीं ओझल हो जाते थे, तो वो व्यथित - व्याकुल हो जाती थी और तुम्हें दर-बदर ढूंढती - फिरती थी तथा जब तक तुम्हें देख ना लेती तब तक कहीं चैन न पाती थी।। और..............! तुम्हारे बचपन के उन दिनों में...जब तुम बहुत छोटे थे तब उसने अपने मजबूत हाथों की ऊँगली तुम्हारे कोमल हाथों में थमाकर तुम्हें चलना सिखाया था...लेकिन तब तुम्हें उस "माँ" के सहारे का अहसास नहीं था...और आज जिंदगी में जब अकेले चले हो तो उसका महत्व अब समझ में आया हैं..! गजब त्रासदी हैं, कि जिस माँ के हृदय में ममत्व - महान रूपी शांत सागर खुशी की विशाल हिलोरें लेता था वह अब सूखने लगा हैं...क्योंकि तुमने उसे संताप ही वो दिया है..!
©SD• @rya
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