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मेरे शिक्षक, जिनका मैं दिल से बहुत सम्मान करता था, लेकिन उन्होंने वास्तव में मुझसे कभी सहानुभूति नहीं रखी थी

              "Note No. 65"


      कहानी तब की हैं, जब मैं Class 11th का Student था। उस वक्त एक रोज मैंने अपने School के Principal Sir के हाथों बहुत मार खाई थी, और उनसे मिले निरीह अपवाद को सहा था...मेरा कोई दोष अथवा गलती नहीं थी...और अगर दोष होता भी तो कोई किसी को इस तरह से कलंकित नहीं करता हैं।...बस मेरे पास Cellphone था तथा स्कूल के Rules & Regulations के मुताबिक School में विद्यार्थियों को Cellphone लाना वर्जित था।...निश्चित ही उन्हें मुझे प्रताड़ित करने व पीटने का कोई बहाना चाहिए था, जोकि मेरे पास Mobile Phone उपलब्ध होने से उन्हें वो बहाना मिल गया था। वैसे School में और भी बहुत से लड़कों के पास Cellphone थे, पर कभी किसी पर इतनी सख्ती नहीं दिखाई गई जितनी कि मुझपर ! उस एक बात से शुरू करके साथ ही कईं और आरोप-प्रत्यारोप लगाकर मुझे उस दिन बहुत पीटा था...कितना ही गुस्सा मुझपर उड़ेल दिया था। मेरा फ़ोन ज़ब्त कर लिया गया। उन्होंने मुझे थप्पड़, घूँसे और छड़ी से मारा और बहुत देर तक तिरस्कृत और मानहानि से भरी बातों से अपमानित किया था...मुझे सब के सामने एक बुरा Student साबित कर दिया गया था...इतना सब कुछ होने पर भी मैंने अपने बचाव और विरोध में उनसे एक शब्द भी नहीं कहा था, मैंने अपनी तरफ से कोई सफाई नहीं दी थी !  https://www.amazon.in/dp/B09576CYNP/ref=cm_sw_r_cp_apa_glt_fabc_dl_0RYCJERJRKN9890R288D                                                                     उस समय में मेरी Life में पहले से ही बहुत-सी परेशानियां थी। कईं उथल-पुथल के साथ मैं विभिन्न मानसिक तनाव से गुजर रहा था वस्तुतः मेरी जिंदगी में कुछ भी सही नहीं चल रहा था...मैंने सब बातों से उबरने के लिए खुद से कईं समाधान खोजे पर हर बार मुझे नाकामी ही हाथ लगी,  मैं कभी खुद को संभाल नहीं पाया । मेरी पढ़ाई Disturb थी और मैं अपनी Study की लय खोकर दूसरी अन्य चीजों के पाले पड़ चुका था, मैं दिन प्रतिदिन पढ़ाई में कमजोर होता जा रहा था, फिर भी अंदर अपनी पुरानी Image वाले एक Extra-Ordinary Boy का Attitude जरूर था, So इसी basis पर मैंने 11th Class में Mathematics subject with Aditional Bio के साथ Select किया था, पर हाल वही बेहाल ही हुआ...इन Subjects को मैं बिल्कुल Cover नहीं कर पाया।ऐसे में Teachers मुझसे नाराज भी होने लगे थे और शायद कोई-कोई मेरे प्रति कुछ-कुछ थोड़े चिंतित भी!                डॉ. घनश्यामदास खत्री सर, जो उस समय हमारे School के Principal थे...वही, जिन्होंने मुझे बेज़ा प्रताड़ित किया था! वो हम सब Students के लिए iconic थे, जिनसे हम सब बहुत कुछ सीखते और समझते थे। वो सबको कईं प्रकार से विभिन्न विषयों के संबंध में बहुत अच्छे से Treat करते थे। वो मेरे दिल के बेहद करीब थे, मैं Personally उनकी बहुत Respect करता था...पर आजतक कभी समझ नहीं आया कि उन्होंने मेरे साथ इतना अपमानजनक Behave किया था, वो अक्सर मेरे विरुद्ध बातें करते रहते थे। मेरे प्रति उनका ऐसा डाह पूर्ण आचरण तब मेरे लिए आश्चर्य और कईं प्रश्नचिह्न पैदा करता था। इस तरह इस बात पर भी मुझे संदेह था कि उन्होंने कभी मुझसे सच्ची सहानुभूति रखी हो। उनका व्यवहार मेरे प्रति दिन पर दिन बहुत बेरुखा एवं सख्त होने लगा था, उस दिन के बाद से उन्होंने कभी मुझसे अच्छे से बात नहीं की थी, जबकि मन ही मन मैं उनके प्रति सच्ची चाहत और आदर भाव रखता था।                                         सख्ती और बेरुखापन अगर हितार्थ के अर्थ में अपनाया गया हो, तो माना जरूर जायज़ हैं, लेकिन आंतरिक ईर्ष्या-द्वेष और अवहेलना की दिशा में हो, तो सरासर अनुचित एवं दोषपूर्ण ही हैं। उस घटना ने मुझे अंदर से बहुत तोड़ा था, मैंने भावुकता से भरे अटूट विश्वास को खोया था, मैंने अपने वास्तविक से भ्रम और मोह को टूटते देखा था...और उस दिन की घटना तथा मेरे प्रति उनके अक्सर किये गए घृणित बर्ताव को याद करके मैं बहुत बार छुपकर अकेले में रोया था !!   

                                    ©SD. Arya   

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