" Note - 72 "
हम अचानक दस्तक देने वाले मौकों, किसी के जबरन उकसाने या यकायक किसी के सहारे अथवा किसी के योगदान से ही अच्छा करने की शुरुआत कर सकते हैं ना कि स्वतः ही कुछ कर गुजरने के प्रण की राह देखते रहें...! अवसर कैसा भी हो हमारे लिये जायज होता हैं, बस शर्त ये हैं कि उसकी जड़ें सत्य की गहराई में धँसी हुई होनी चाहिए।...और ना ही कभी हममें ये संशय उत्पन्न होने चाहिए कि, " क्या हम इतने मामूली हैं कि छोटी - छोटी बातों से ही नहीं ऊबर पा रहें हैं और आखिर हम बेहतर करने का संकल्प क्यों नहीं ले पा रहे हैं या अपनी जीवन शैली में सुधार क्यों नहीं कर पा रहे हैं...इत्यादि ! "
मेरे विचार से इस तरह की मनःस्थिति विघातक होती हैं जो किसी के लिए सही और सुरक्षित नहीं...इसके विपरीत हम तात्कालिक व अजनबी अवसर और वर्तमान का सही और संतुलित समायोजन कर आगे बढ़ सकते हैं...हमें इस बात का हमेशा अहसास रहना चाहिए कि किन्हीं भी परिस्थितियों में हम कभी गलत हो ही नहीं सकते और विशुद्ध भाव से ये महसूस करें कि इन पलों में जिन्हें हम अभी जी रहें हैं उनमें हम क्या और कितने सही हैं...और वाकई जब हम खुद के प्रति पूरी श्रद्धा से जवाबदेह होते हैं, तब हमारे लिए अप्रतिम तथा बेमिसाल प्रस्फुटित होता हैं...जोकि हमें असाधारण अभ्युदय की ओर ले जाता हैं..!
©SD. Arya
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