" note 71 "
Sep.23, 2020 आज के दिन जरूरी सामान खरीदने के लिए माँ ने मुझे हाट-बाजार भेजा था।...माँ ने मुझसे लाने वाली तमाम वस्तुओं की सूची लिखवाई और सख्त हिदायत दी कि तू ये-ये सामान लेकर ही आना, क्योंकि उनको पता था कि, मैं सामान खरीदने के मामले में बहुत उदासीन हूँ, जरूरत के सामान भी मैं बहुत सोच समझकर खरीदता था, जब तक बहुत आवश्यक न हो मैं ऐसी किसी भी चीज़ को खरीदने से परहेज करता था, जिसके बिना काम चल जाता था, क्योंकि उस वक्त मैं अपनी Economic स्थिति को Grow करने की राह पर था और इस संबंध में मुझे लापरवाही बर्दाश्त नहीं थी, अतः मैं बहुत सजग एवं सतर्क था।
जब मैं हाट-बाजार में गया तो वहाँ के माहौल को अपने हिसाब से देखने लगा...वहाँ लोगों की बहुत भीड़ थी। विभिन्न वस्तुओं की बहुत सारी दुकानें लगी थी। सब लोग ज़ोर-शोर से अपनी-अपनी जरूरत के सामान खरीद रहे थे, जबकि मैं उन सब को सामान खरीदते हुए देख रहा था और बाजार में घूम रहा था और कभी-कभी मैं सामान खरीदने के लिए अपना Wallet बाहर निकालता और फिर उसे रख लेता था, क्योंकि मैं कुछ भी खरीद लेने का मन नहीं बना पा रहा था...आख़िरकार हिम्मत जुटाकर मैं कुछ सामान खरीदने के लिए एक दुकान पर रुक गया...मैंने दुकान वाले से चीज़ों के दाम पूछे और पर्स से ₹500 का नोट निकालकर हाथ में लिया तो उस नोट को हाथ से छोड़ने का मेरा जी ही नहीं किया...क्योंकि त्तब उस 500 के नोट में मुझे Investment दिखाई दे रहा था, मैं सोंच रहा था कि मुझे इस पैसे को किसी भी बचत के प्रकारों में निवेश करना चाहिए बजाय इसे व्यर्थ के साजो-सामान में खर्च करने के।...कुछ देर सोंच लेने के बाद मैंने वहाँ से कुछ भी सामान न खरीदने का निर्णय लिया एवं पुनः अपना ₹500 का नोट पर्स में रखा व दुकान वाले से सामान न खरीदने का मना करके वहाँ से चल दिया...दुकानदार ने मुझसे सामान न खरीदने का कारण पूछा...मैंने उस दुकान वाले को सच बताते हुए कहा कि इस पैसे से सामान खरीदने के बजाय मैं इसको बचत में निवेश करना चाहता हूँ इसलिए आपसे सामान न खरीदने के लिये मुझे माफ करना।...वो दुकानदार मुझे अचंभित दृष्टि से देख रहा था।
गोयाकि उस दिन मैं पूरा बाजार घूमने के बाद बिना कुछ खरीदे ही वापस खाली हाथ घर आ गया था।
©$D. Arya
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