🔸Note No. 43🔸
स्कूल की किताबों की वो खुशबू मुझे आज भी याद है।
बारिश शुरू होते ही स्कूल भी शुरू हो जाते थे। गर्मी की छुट्टियों की तपन बर्दाश्त करने के बाद...बरसात की ठण्डी बूँदें तन को शीतल कर देती थी...वाकई वर्षा ऋतु में भीगते हुए स्कूल जाने में अलग ही मजा आता था...और हमारी हथेलियों पर उन बूँदों की छुअन से कमाल की खुशी महसूस होती थी...झमाझम बारिश के साथ मैं भी मस्ती में झूम उठता था।
और इसी तरह बारिश के संग नई किताबों की वो महक बरबस ही मन मोह लेती थी...उसमें अलग सा जुड़ाव महसूस होता था।
बस्ता खुलता...फिर सब अपनी - अपनी किताबें खोल लेते और क्लासरूम में पढ़ाई की लहर चल जाती...फिर सारे बच्चे अध्ययन माला की कड़ी से जुड़ जाते। जब क्लास में कोई टीचर नहीं होते तब मस्तियाँ भी खूब करते थे...प्राइमरी स्कूल की वो खूबसूरत यादें स्मृत्ति में आज भी जिंदा है ।
और इसी तरह बारिश के संग नई किताबों की वो महक बरबस ही मन मोह लेती थी...उसमें अलग सा जुड़ाव महसूस होता था।
बस्ता खुलता...फिर सब अपनी - अपनी किताबें खोल लेते और क्लासरूम में पढ़ाई की लहर चल जाती...फिर सारे बच्चे अध्ययन माला की कड़ी से जुड़ जाते। जब क्लास में कोई टीचर नहीं होते तब मस्तियाँ भी खूब करते थे...प्राइमरी स्कूल की वो खूबसूरत यादें स्मृत्ति में आज भी जिंदा है ।
©SD. Arya

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