सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

आखरी वक्त में मेरी प्राथमिक टीचर का आशीर्वाद न मिलने का दर्द मुझे दुख देगा

                     Note No. '47'
       
     
                 और आखिरकार मुझे वो दिन देखना पड़ा कि मैं अपनी आदरणीया प्राथमिक टीचर से उनके आखिर वक्त से पहले नहीं मिल पाया था । वो इस खोखली दुनिया को छोड़कर जा चुकी थी...हमेशा के लिए !
                मेरी दिली ख़्वाहिश थी कि मैं एक दिन काबिल और बहुत अच्छा इंसान बनकर ही उनसे मिलूंगा...और यही एक वजह थी कि मैं उनसे कभी मिलने नहीं गया...पर मैं गलत था जो ये सोचा करता था कि कुछ अच्छा करने के बाद मैं उनसे जाकर मिलूंगा...मेरी ये आशा पूरी होने से पूर्व ही वो चली गई ।
               काश मैं उनसे समय रहते मिल लेता...मुझे इस गलती का मलाल सालता रहेगा ।     
                मुझे इस तरह का फ़ैसला नहीं करना चाहिए था, पर मैं क्या करता मेरी भी कुछ मजबूरियां रही होगी, जो मुझे उनसे मिलने से रोकती थी। मुझे इस बात का भी कभी अंदाजा नहीं था कि वो इतनी जल्द हम सब को छोड़कर चली जाएगी। काश मैं अंतिम बार उनके चरण स्पर्श कर पाता...पर अफ़सोस मेरी ये हसरत अधूरी ही रह गई। और उनसे ना मिल पाने का वो दर्द मुझे अत्यधिक तकलीफ देगा । अब क्या हो सकता था...मैं अपने निश्चय पर सिर्फ पश्चाताप ही कर सकता था।
                 ...और मेरी परम श्रद्धेय टीचर को खो देने के बाद मैंने ये महसूस किया था कि कोई किसी के लिए नहीं रुकता...सभी बिन जताये अचानक से छोड़कर चले जाते हैं...मेरी भी कितनी उम्मीद थी कि मैं अपनी माननीय गुरु के पास जाके उनके चरण वंदन कर उनका आशीष ग्रहण करके खुद को खुश किस्मत समझ पाऊंगा...पर ऐसा नहीं हो पाया मेरी तमाम आशाएं धरी की धरी रह गई थी...मैं इस हादसे के लिए व्याकुल और शोकजदा था !
                                         
                                                               ©SD. Arya

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

एक शिक्षक, जिसने जीवन पढ़ाया !

                                                Note No. '42'                                अपने गाँव से कक्षा पाँचवीं (जिला बोर्ड) की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद मेरा चयन संभाग स्तरीय शासकीय प्रतिभावान आवासीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, उज्जैन में हुआ। यह चयन मेरे जीवन का पहला बड़ा मोड़ था—एक ऐसा मोड़, जहाँ उत्साह से अधिक अनजानी आशंकाएँ मेरा इंतज़ार कर रही थीं। जब मैं पहली बार उस विद्यालय परिसर में पहुँचा, तो सबकुछ अपरिचित और कुछ हद तक वियोजित-सा लगा। नया स्कूल, नए शिक्षक, नए चेहरे और एक बिल्कुल अलग वातावरण—मानो मैं अपने परिचित संसार से अचानक बहुत दूर आ गया हूँ। मुझे वहाँ छोड़ने मेरे बड़े भाई आए थे। जब तक वे मेरे साथ रहे, तब तक मैं स्वयं को संभाले रहा; लेकिन जैसे ही वे लौटे, मेरे भीतर का साहस जैसे उनके साथ ही चला गया। उस रात मैं सो नहीं पाया। मैंने तकिए को अपने चेहरे से सटा लिया और चुपच...

🪷स्मृतियों में जीवित एक गुरू🪷

                                     “Note No. 111”             डॉ. खत्री सर का मैं अत्यंत प्रिय शिष्य था। चूंकि मैंने अपनी स्कूली पढ़ाई को अस्त-व्यस्त कर लिया था, इस कारण एक बार उन्होंने आक्रोश में मुझे कठोर दंड दिया। उससे पूर्व उन्होंने किसी भी कारण मुझे कभी नहीं पीटा था—क्योंकि मैंने कभी उन्हें वैसा अवसर ही नहीं दिया था। पर वह प्रहार क्रोध का नहीं, असीम स्नेह का परिणाम था। वह दंड एक ऐसे गुरु का उत्तरदायित्व था, जो अपने प्रिय शिष्य को पतन की ओर जाते देखकर मौन नहीं रह सकता। वह दंड साधारण नहीं था—वह शिष्य के लिए संजीवनी बूटी था, जीवनदायी, चेतना जगाने वाला। डॉ. जी.डी. खत्री जैसे शिक्षक सदियों में विरले ही जन्म लेते हैं। ऐसे व्यक्तित्व किसी कालखंड की संपत्ति नहीं होते, वे युग की चेतना बन जाते हैं—इसीलिए उन्हें हम सदी के महानायक कहते हैं। उनका व्यक्तित्व असाधारण था, गरिमा और करुणा का अद्भुत संगम। वे लाजवाब थे। और यह मेरा ही दुर्भाग्य रहा कि मैं उनके उत्तम व्यक्तित्व ...

मोहब्बत में कभी विकल्प नहीं होता

                     Note No. “108”                          यह एक गहरी और भावनात्मक भावना से भरी हुई विचारधारा का वर्णन हैं...सच्ची मोहब्बत में कभी विकल्प नहीं होता, और अगर विकल्प हुआ, तो फिर वो मोहब्बत ही नहीं हैं, छलावा हैं...फिर चाहे वे जिंदगी भर मिले या ना मिले, इस बात से क्या फ़र्क पड़ता हैं !...वास्तव में उसी एक की खातिर बेलाग खुशियों का त्याग करके ताउम्र उसके इंतजार में जिंदगी तमाम ख़ाक कर ली जाती हैं...पर अन्यथा नहीं हुआ जाता !...जिसे हम बेतहाशा चाहते हैं वो अंशगत हो जाता हैं, हममें समाहित हो जाता हैं ! अंततः उसके ना लौटने अथवा उसको फिर कभी ना पाने की नाउम्मीदी में भी किसी और का नहीं हुआ जा सकता, तथापि जिंदगी तन्हाई में बिताकर ताउम्र प्यार की वफ़ा और शुचिता को अखण्ड रखा जाता हैं।                                             प्रेम अपने प्रियतम के प्...