🔸Note No. 46🔸
कईं सारे लोग ऐसे होते हैं, जो ये मानते होंगे कि आखिर हमारे साथ ही इतनी सारी समस्याएँ क्यों हैं...हम ही क्यों इन तकलीफों से घिरे हुए हैं ? पर मेरे हिसाब से उनका ये सोचना पूर्णतया सच नहीं हैं। वास्तव में समस्याएं इंसान खुद पैदा करता है...अर्थात असल समस्या उनकी नकारात्मक सोच अथवा विचारों से पनपती हैं और लोगों का ये वहम भी हो सकता हैं कि उनकी समस्या अन्य लोगों की समस्या से बड़ी हैं जबकि ये भी सच नहीं हैं... हम दूसरों की मजबूरियों को नहीं जानते...हो सकता है उनकी परेशानी हमसे अधिक भयावह और कष्टकारक हो !
और हमें ये भी भलीभांति विदित होना चाहिए कि हम अपनी समस्या को जितना अधिक बड़ा मानेंगे वो उतना ही बड़ा रूप धारण कर लेगी तथा एक दिन हमें हार मानने पर मजबूर कर देगी। अतः हम इस मामले में सजग रहें कि हम समस्याओं से डरें नहीं जबकि उनका दृढ़ता से सामना करें और एक विजेता सी हिम्मत दिखाएं...मगर अफ़सोस लोग ऐसे मौकों पर अक्सर हाथ खड़े कर देते हैं...वे हार मान लेते हैं !
©SD. Arya
कईं सारे लोग ऐसे होते हैं, जो ये मानते होंगे कि आखिर हमारे साथ ही इतनी सारी समस्याएँ क्यों हैं...हम ही क्यों इन तकलीफों से घिरे हुए हैं ? पर मेरे हिसाब से उनका ये सोचना पूर्णतया सच नहीं हैं। वास्तव में समस्याएं इंसान खुद पैदा करता है...अर्थात असल समस्या उनकी नकारात्मक सोच अथवा विचारों से पनपती हैं और लोगों का ये वहम भी हो सकता हैं कि उनकी समस्या अन्य लोगों की समस्या से बड़ी हैं जबकि ये भी सच नहीं हैं... हम दूसरों की मजबूरियों को नहीं जानते...हो सकता है उनकी परेशानी हमसे अधिक भयावह और कष्टकारक हो !
और हमें ये भी भलीभांति विदित होना चाहिए कि हम अपनी समस्या को जितना अधिक बड़ा मानेंगे वो उतना ही बड़ा रूप धारण कर लेगी तथा एक दिन हमें हार मानने पर मजबूर कर देगी। अतः हम इस मामले में सजग रहें कि हम समस्याओं से डरें नहीं जबकि उनका दृढ़ता से सामना करें और एक विजेता सी हिम्मत दिखाएं...मगर अफ़सोस लोग ऐसे मौकों पर अक्सर हाथ खड़े कर देते हैं...वे हार मान लेते हैं !
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