🔸Note No. 34🔸
मैं तब तक सोता रहा था...जब तक सभी अपनी - अपनी मंजिल पाकर वापस लौट आये थे..!
मैं भी अपनी मंजिल पाने की सुखद उम्मीद लिए एक सफर पर निकला था...मगर रास्ते में मिली भूलभुलैया में ऐसा गुम हुआ कि निकल ही नहीं पाया और उसी में कहीं विलीन होने लगा था...और तब तक मुझे होश ही नहीं रहा था कि मेरा ध्येय क्या है।
कई तरह की उलझने थी, जिनसे मैं ऊबर नहीं पाया था। वे सारे लोग जो मेरे साथ चले थे...अपनी मंजिलों को हासिल करके मेरे सामने से गुजर रहे थे...उनके चेहरों पर अपने लक्ष्य को पा लेने की ख़ुशी स्पष्ट देखी जा सकती थी।...और तब मुझे खुद पर तरस भी आया था...लेकिन मैं अब अपनी नाकामी पर अफ़सोस जताने के सिवा और कर भी क्या सकता था..!
मैं जब जागा, तब तक तो बहुत देर हो चुकी थी...और तब मैंने महसूस किया था कि मैं अपना बहुत कुछ खो चुका हूँ...अब मैं क्या क्या करूंगा...इस तरह की विभिन्न बातों के बारे में सोचकर अलग - सा डर महसूस करने लगा था...समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या किया जाये...कैसे जिया जाये ?
पर फिर भी मेरे अंदर एक विश्वास जिन्दा था..!
©SD. Arya
मैं तब तक सोता रहा था...जब तक सभी अपनी - अपनी मंजिल पाकर वापस लौट आये थे..!
मैं भी अपनी मंजिल पाने की सुखद उम्मीद लिए एक सफर पर निकला था...मगर रास्ते में मिली भूलभुलैया में ऐसा गुम हुआ कि निकल ही नहीं पाया और उसी में कहीं विलीन होने लगा था...और तब तक मुझे होश ही नहीं रहा था कि मेरा ध्येय क्या है।
कई तरह की उलझने थी, जिनसे मैं ऊबर नहीं पाया था। वे सारे लोग जो मेरे साथ चले थे...अपनी मंजिलों को हासिल करके मेरे सामने से गुजर रहे थे...उनके चेहरों पर अपने लक्ष्य को पा लेने की ख़ुशी स्पष्ट देखी जा सकती थी।...और तब मुझे खुद पर तरस भी आया था...लेकिन मैं अब अपनी नाकामी पर अफ़सोस जताने के सिवा और कर भी क्या सकता था..!
मैं जब जागा, तब तक तो बहुत देर हो चुकी थी...और तब मैंने महसूस किया था कि मैं अपना बहुत कुछ खो चुका हूँ...अब मैं क्या क्या करूंगा...इस तरह की विभिन्न बातों के बारे में सोचकर अलग - सा डर महसूस करने लगा था...समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या किया जाये...कैसे जिया जाये ?
पर फिर भी मेरे अंदर एक विश्वास जिन्दा था..!
©SD. Arya

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