तब मुझे नहीं पता था कि जिस दौर से मैं गुजर रहा हूँ...वो मेरे लिए सही हैं अथवा गलत और उसके मेरे लिए क्या मायने हैं..?
मैं इस बात से भी बेखबर था कि आने वाला कल मेरे लिए क्या सिला लेकर आएगा..! मेरे लिए जिंदगी के मायने दूसरी तरह के होने लगे थे । मुझे नहीं मालूम था कि मेरे यद्भविष्य की योजनाएं अथवा लक्ष्य क्या होने चाहिए...। मैं जीवन को जिंदादिली से जीने की बजाय उसके होने के असल कारण और मतलब ढूंढने लगा था। दुनिया की विविधता में विद्यमान विभिन्न आयामों में, मैं यथार्थता के गंभीर अहसास को महसूस करता था।
व्याप्त अंधविश्वास, कुरीतियों, अधर्मता, पाखंड, भेदभाव, करुणा विहीन क्रूरकृत्य, आचरण - भ्रष्टता इत्यादि तथा और भी कई दोषजन्यताओं को मैंने करीब से जाना था...उनकी बर्बरता को देखा था...और इन्हें देख मुझे बेहद तकलीफ होती थी..! मुझे नहीं पता और मैं आज भी इस बात को नहीं बता सकता कि उस वक्त इन सब बातों को लेकर मैं क्या, कितने और किस तरह के दर्द को महसूस करता था..!
मैं इस बात से भी बेखबर था कि आने वाला कल मेरे लिए क्या सिला लेकर आएगा..! मेरे लिए जिंदगी के मायने दूसरी तरह के होने लगे थे । मुझे नहीं मालूम था कि मेरे यद्भविष्य की योजनाएं अथवा लक्ष्य क्या होने चाहिए...। मैं जीवन को जिंदादिली से जीने की बजाय उसके होने के असल कारण और मतलब ढूंढने लगा था। दुनिया की विविधता में विद्यमान विभिन्न आयामों में, मैं यथार्थता के गंभीर अहसास को महसूस करता था।
व्याप्त अंधविश्वास, कुरीतियों, अधर्मता, पाखंड, भेदभाव, करुणा विहीन क्रूरकृत्य, आचरण - भ्रष्टता इत्यादि तथा और भी कई दोषजन्यताओं को मैंने करीब से जाना था...उनकी बर्बरता को देखा था...और इन्हें देख मुझे बेहद तकलीफ होती थी..! मुझे नहीं पता और मैं आज भी इस बात को नहीं बता सकता कि उस वक्त इन सब बातों को लेकर मैं क्या, कितने और किस तरह के दर्द को महसूस करता था..!
©SD. Arya

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