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मैं बहुत जिद्दी बच्चा था

                        🔸NOte • 2️⃣9️⃣🔸

              
                    मैं बहुत ज़िद्दी बच्चा था।हर वो चीज,जो मुझे पसंद आ जाती... मैं उसके लिये खूब ज़िद करता था और जब तक उसे पा नहीं लेता तब तक माँ - बाबूजी के सामने ठिठकता रहता या रोता रहता था।कभी - कभी माँ ज्यादा परेशान हो जाती तो फिर मेरी पिटाई कर देती थी और जब कभी ऐसे मौकों पर पिताजी मौजूद रहते, तो मैं दौड़कर उनके पास चला जाता था और वो मुझे माँ की प्रताड़ना से बचा लेते थे।
                 मेरे पिताजी ने मुझे कभी नहीं पीटा...वो मुझे बचपन में बहुत लाड़-प्यार करते थे...खैर आज भी करते है पर अब उस तरह जताते नहीं अपितु मेरे प्रति सख्त रवैया अपनाते हैं, जिसमें उनका प्यार निहीत होता हैं।...बचपन में यूंही कभी गुस्से में आकर उन्होंने मुझे एकाध बार झकझोर दिया होगा...और उनका एक ही थप्पड़ मुझे याद हैं।
                  हाँ पर डाँट-फटकार तो वो बचपन से आज तक मुझे लगाते रहते हैं और अब तो अक्सर मुझसे नाराज़ भी रहते हैं,ठीक से बात भी नहीं करते...क्योंकि मैं उनकी नजर में किसी भी अच्छे काम के लायक जो नहीं बचा हूँ...पता नहीं मैं कब उनके दृष्टिकोण से एक अच्छा इंसान साबित हो पाऊंगा या उन्हें कुछ बेहतर करके दिखाऊंगा, जिससे कि वो असल में सच्ची ख़ुशी महसूस कर सकें।

                                      ©SD. Arya 

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