Post No. ''99''
कईं बार अवसरों और परिस्थितियों के असंभाव्य संयोजन बेहतरीन परिणाम पैदा करते हैं। ये होता हैं कि किसी कार्य के नियोजन में उन अवसरों को समाहित करने से काम बन जाता हैं, जिनका प्रयोग असंभाव्य और मौजूदा परिस्थिति, जिनके बिल्कुल खिलाफ खड़ी होती हैं।...मगर एक दृढ़ निश्चय युक्त लिया गया निर्णय, कार्य को पूर्ण बनाता हैं और हमारी उस धारणा को भी तोड़ना हैं, जो हममें परम्परावादी सोंच एवं संकोच से उत्पन्न होती हैं। बहुत बार महत्वपूर्ण प्रयोजनों को पूर्ण करने के लिए संभव से दिखने वाले अवसरों पर गौर किया जाता हैं और इस गलतफहमी में असंभव से दिखने वाले लेकिन उपयोगी अवसरों को उनके असफल होने के भय से नजरंदाज कर दिया जाता हैं, जबकि ये असंभव से दिखने वाले अवसर संभावित लगने वाले अवसरों से अधिक उपयोगी एवं असरदार साबित हो सकते हैं। इन असंभाव्य अवसरों का परिस्थिति के अनुसार एक समुचित संयोजन...विचित्र व कारगर परिणाम प्रदान कर सकते हैं !
©SD. Arya

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