Note No. ‘102’
ये लगभग तब की बात हैं, जब शायद मेरे दूध के दांत गिर रहे होंगे...और उस वक्त मैं अपने मामा के घर था ।...ये एक हादसा था, जो किसी के लिए भी अत्यंत कष्ट कारक और दर्दनाक था ।
उस दिन मैं अपनी मां और नानी के साथ खेतों पर था । वहां नजदीक ही एक कम गहरा, छोटा और फिसलन भरा कुआं था, जिसमें लोग अक्सर उतरकर आसानी से पानी भर लिया करते थे । उस दिन मेरी मां और नानी के साथ कुछ महिलाएं खेतों में काम कर रही थी। और उसी दिन गांव के दो लड़के, जो लगभग मेरे जितने ही थे, उस कुए के गिर्द खेलने आ गए थे और उन्हें देखकर मैं भी उनके साथ खेलने के लालच में उनके पास आने लगा। मगर मेरे वहां पहुंचने के पहले ही उनमें से एक लड़का कुए में उतर चुका था और फिसल कर कुए में गिर गया था...मैंने उसे डूबते हुए देखकर चीखना – चिल्लाना शुरू कर दिया था । मैं जोरों से आवाज देकर मां और नानी को कुए के पास बुला रहा था । मेरी आवाज़ सुनकर मां, नानी और अन्य औरतें और पास ही खेतों में काम कर रहे कुछ और लोग भागकर कुए के आसपास जमा हो चुके थे...पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी... लड़का तब तक कुए में पूरी तरह से डूब चुका था। उसे निकालने के लिए मेरे सबसे छोटे मामा और अन्य लोगों ने कुए में डुबकियां लगाई और काफ़ी मशक्कत के बाद लड़के को बाहर निकाल पाए ।... लेकिन उसे ढूंढने में जरूरत से ज्यादा वक्त लग चुका था... पानी से बाहर निकालकर लड़के को पेट के बल उल्टा लेटाकर उसकी पीठ पर दबाव बनाकर उसके शरीर से बहुत सारा पानी निकाला, परंतु ये सब व्यर्थ था...लड़का तब तक मर चुका था। कुछ देर बाद लड़के के माता – पिता भी वहां आ चुके थे...वो बहुत जोरों से रो रहे थे। वहां लोगों का बहुत बड़ा हुजूम इकट्ठा हो चुका था और पूरा माहौल अत्यंत शोकपूर्ण हो चुका था...लोग दुःख में डूबे थे। मुझे भी बहुत दुःख और दर्द महसूस हो रहा था...मैं लड़के की मौत देखकर बेहद हैरान, डरा – सहमा था। ये हादसा मेरे लिए अत्यंत दर्दनाक और वेदनीय था, जिसकी तब मेरा नादान और भोला मन व्याख्या नहीं कर सकता था...और कईं दिनों तक मैं उस दर्द को अपने स्तर पर महसूस करता रहा !😔
©SD. Arya

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