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कुछ चोटें ऐसी होती हैं जो दिखाई नहीं देतीं, पर भीतर बहुत कुछ बदल देती हैं।

                            “Note No. 120”

मैं उस बात के लिए आगे बढ़कर कभी नहीं कहूँगा—न किसी से आग्रह करूँगा, न किसी को मनाने की कोशिश करूँगा—जब सामने वाले ने बोलने की, समझने की, या भावनाओं को महसूस करने की सारी संभावनाएँ स्वयं ही तोड़ दी हों। जब शब्दों के सारे रास्ते बंद कर दिए गए हों और मन पर ऐसा आघात लगा हो, जिसकी गूँज भीतर बहुत देर तक सुनाई देती रहे।

कुछ चोटें ऐसी होती हैं जो दिखाई नहीं देतीं, पर भीतर बहुत कुछ बदल देती हैं। वे मनुष्य के स्वाभिमान को छू जाती हैं, उसके मौन को गहरा कर देती हैं। उस क्षण के बाद मन बार-बार उसी दहलीज़ पर लौटकर खड़ा नहीं होना चाहता, जहाँ से उसे केवल उपेक्षा और पीड़ा ही मिली हो।

हो सकता है कि उस फेहरिस्त में मेरी ज़िंदगी के सबसे अनमोल, सबसे आवश्यक और सबसे प्रिय क्षण ही क्यों न शामिल हों—वे पल जिनके लिए कभी दिल ने बड़े सपने सँजोए थे। फिर भी, यदि किसी ने उन भावनाओं की कद्र करने की जगह उन्हें ठुकरा दिया, तो उनके पीछे भागना अपने आत्मसम्मान को खो देने जैसा होगा।

मैं जानता हूँ, जीवन में कुछ रास्ते ऐसे होते हैं जिन्हें चाहकर भी दोबारा नहीं अपनाया जा सकता। क्योंकि हर बार लौटना केवल पुराने घावों को फिर से हरा करना होता है। इसलिए शायद बेहतर यही है कि मन उन स्मृतियों को चुपचाप अपने भीतर रखे, पर कदम आगे बढ़ा दे।

और तब, चाहे दिल के किसी कोने में उन पलों की हल्की-सी टीस क्यों न बची रह जाए, मैं फिर भी पीछे मुड़कर नहीं देखूँगा। क्योंकि कुछ दरवाज़े एक बार बंद हो जाएँ, तो उनका बंद रहना ही आत्मा की शांति के लिए सबसे आवश्यक होता है।

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