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डायरी सीरीज: पिताजी कहा करते थे

                              Note No. 128

               Stars ⭐ 🪄 magic' Conection 

          


           “तारों भरी रात और बाबूजी की वो रूहानी बातें”

            क्या आपने कभी गौर किया है कि रात के सन्नाटे में जब हम आसमान की ओर देखते हैं, तो वो टिमटिमाते तारे हमसे कुछ कहना चाहते हैं? आज जब मैं अपनी बालकनी में खड़ा था, तो ठंडी हवा के एक झोंके के साथ बाबूजी की यादें ताज़ा हो गईं।

बचपन के वो दिन मुझे आज भी याद हैं जब बाबूजी मेरे पास बैठकर घंटों ज्ञान की बातें किया करते थे। उनकी बातों में एक अजीब सी कशिश होती थी, जो मेरी जिज्ञासा (curiosity) को जगा देती थी। वह अक्सर मुझसे आसमान की ओर इशारा करके पूछते थे— "बेटा, इन तारों को देखकर तुम्हें क्या महसूस होता है? क्या तुम्हें कोई आसमानी शक्ति महसूस होती है जो तुम्हें परमेश्वर की उस अंतहीन शक्ति से जोड़ती है?"

उस वक्त मैं छोटा था, शायद उनकी बातों की पूरी गहराई को नहीं समझ पाता था, लेकिन मैं बड़े ध्यान से उन्हें सुनता और उनकी बातों में हामी भरता था। मुझे उन सितारों को देखना बेहद अच्छा लगता था। उनकी चमक में एक ऐसा सुकून था जो रूह तक उतर जाता था। ऐसा लगता था जैसे उन दूर चमकते सितारों और मेरे बीच कोई गहरा रिश्ता है।

आज जब बाबूजी पास नहीं हैं, तब समझ आता है कि वे मुझे सिर्फ विज्ञान या भूगोल नहीं समझा रहे थे, बल्कि वे मुझे उस ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Energy) से जोड़ रहे थे जो हमें शांत और विनम्र बनाए रखती है। आज भी जब मैं अकेला महसूस करता हूँ, तो उन सितारों को देखता हूँ और मुझे वही पुरानी शक्ति और सुकून महसूस होता है।

बाबूजी की वो बातें आज भी मेरे जीवन का मार्गदर्शन कर रही हैं। सच ही तो है, हम सब उस अनंत ईश्वर का ही एक छोटा सा हिस्सा हैं।


                                           ©SD. Arya

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